अव्यय किसे कहते हैं ? | अव्यय की परिभाषा, भेद, और उदारहण || 2022

अव्यय किसे कहते हैं

अव्यय या अविकारी किसे कहते हैं ?

अव्यय का शाब्दिक अर्थ है जो व्यय ना हो अर्थात अव्यय  या अविकारी  शब्दों उसे कहते है| जिनमें ,वचन, लिंग, पुरुष आदि के कारण कभी  नहीं बदलते है | जैसे :- वहाँ, पीछे  बहुत, भारी,परन्तु, यहाँ, आगे, , और, तथा, लेकिन, आदि।
उदाहरण :-वरुण  बहुत खाता है ।   तुम मोहन के पीछे भागते हो  
 

अव्यय के भेद:- अव्यय के चार भेद होते है 

  1. क्रियाविशेषण (Adverb)
  2. समुच्चयबोधक (Conjunction)
  3. संबंधबोधक (Preposition)
  4. विस्मयादिबोधक (Interjection)

क्रियाविशेषण किसे कहते हैं

क्रियाविशेषण:- ऐसे अव्यय शब्द जो क्रिया ,विशेषण या अन्य क्रिया विशेषण की  विशेषता  वाताते है   क्रियाविशेषण कहलाते हैं। जैसे :- अभी, यहाँ, बहुत,वहाँ, वैसे,अब, ऐसे, बड़ा,  आदि।
उदाहरण :-
  1. हवा धीरे धीरे चलती है (धीरे धीरे – क्रियाविशेषण )
  2. दीपक अब खा रहा है।    (अब — क्रियाविशेषण)
  3. कितावे धडाधड बिक रही है (धडाधड – क्रियाविशेषण)
  4. मोहन तेज दौड़ता है।    (तेज — क्रियाविशेषण)
  5. सुरेश  धीरे-धीरे बोलता है। (धीरे-धीरे — क्रियाविशेषण)

क्रियाविशेषण के कितने भेद होते है ?

क्रिया विशेषण चार प्रकार के होते है |
  1. स्थानवाचक क्रियाविशेषण
  2. कालवाचक क्रियाविशेषण
  3. परिमाणवाचक क्रिय विशेषण
  4. रीतिवाचक क्रियाविशेषण

(1) स्थानवाचक क्रियाविशेषण:-

जिन क्रिया विशेषण से स्थान एव दिशा का बोध हो वहाँ स्थानवाचक क्रियाविशेषण होता है |जैसे :-बाहर, यहाँ, उधर,इधर,वहाँ, यहीं, वहीं, भीतर, किधर, पास, दूर, दाएँ, बाएँ, ऊपर, नीचे, की तरफ, आगे,पीछे की ओर आदि।

उदाहरण :-
  • मोहन  यहाँ रहता है।      
  • सड़क के बाएँ चलो।  
  • मनवीर ऊपर है 
  • वरुण सामने खड़ा है 

(2) कालवाचक क्रियाविशेषण :-

जिन शब्दों से काल या समय का बोध हो उसे  काल वाचक क्रिया विशेषण कहते है  जैसे:-
कल आज, ,सदैव, अब, जब, सायं, प्रातः,अभी, कभी,  तुरंत, पहले, आजकल,  नित्य, सदा, लगातार,  बहुधा, प्रतिदिन, रोज, कई बार, हर बार दिन भर,आदि।
उदाहरण:-
  • मुकेश अभी जा रहे हैं।      
  • दीपक आजकल खेल रहे हैं।
  • तरुण प्रतिदिन हिंदी पढ़ रहे हैं। 
  • माँ सुबह नाशता वनती है 
(4) परिमाणवाचक क्रियाविशेषण:-
जिस शब्द से परिमाण का बोध हो  अर्थात  क्रिया की अधिकता न्यूनता,मात्रा , तुलना,आदि का बोध हो, उसे परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।परिमाणवाचक क्रियाविशेषण पांच प्रकार के होते है 
  1. अधिकताबोधक (अधिक,कम, खूब,  अति, भारी, बिल्कुल निरा )
  2. न्यूनता बोधक (थोडा लगभग जरा कुछ टुक किंचित  अनुमानित )
  3. पर्याप्ति वाचक (केवल बस काफी ठीक बरावर इति )
  4. श्रेणी वाचक (एक-एक, यथा क्रम, बरी-बरी,थोडा-थोड़ा )
उदाहरण :
प्रीती थोडे फल खाती है |             
वह बहुत पढ़ती  है।          
मोहन कितना सोता है ?   
 
(3) रीतिवाचक क्रियाविशेषण — जिस शब्द से क्रिया के कार्य का तरीका का बोध हो ( निश्चय, अनिश्चय , स्वीकार , निषेध आदि) उसे रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं। जैसे:- कैसे, जैसे,ऐसे, वैसे, तेजी से, जोर-जोर से,    अवश्य,  तो भी, ही, शायद,क्योंकि, चूँकि, अतः, न, नहीं, मत, इसलिए, धीरे-धीरे आदि।
उदाहरण:-
  • रात को अचानक वारिश होने लगी 
  • वरुण ध्यानपूर्वक सुनता है 
  • वह ऐसे लिखता है।   
  • वह शायद जाए।        

संबंधबोधक अव्यय  किसे कहते हैं?

संबंधबोधक:- जो अव्यय शब्द वाक्य में  संज्ञा या सर्वनाम के बाद लगकर वाक्य के दूसरे शब्द के साथ संबंध वताता है | उसे संबंधबोधक अव्यय  कहते हैं। जैसे:-
ऊपर नीचे पीछे बहार भीतर बिना भरोसा भर सहित निकट आगे पास लगभग ,दूर,अंदर, ओर,तरफ, पार, द्वारा, मारफत, लिए, सिवाय,अलावा,संग, साथ,विरुद्ध, खिलाफ,आदि।
उदाहरण:-
  • वरुण छत पर खड़ा है 
  • पुरुषार्थ के बिना जीवन नही है 
  • रेखा पेड़ के नीचे खड़ी है 
  • श्याम  के आगे मैं खड़ा हूँ। 
  • तुम्हारे आगे मनवीर खड़ा है।    

संबंधबोधक अव्यय कितने प्रकार के होते है ?

ये तीन प्रकार के होते है 

  1. अर्थ के आधार पर  (13 )
  2. प्रयोग के आधार पर (2) 
  3. व्युत्पति के आधार पर (2)

अर्थ के आधार पर:- अर्थ के आधार पर इनके 13 भेद होते है 

  1.  स्थान वाचक:- भीतर, बाहर, नीचे, ऊपर, सामने, तले,वीच,  परे, पास,निकट आदि  
  2. काल वाचक:- बाद,आगे, पीछे,  पश्चात् , लगभग, पहले, आदि  
  3. दिशा वाचक:- तरफ, पार, प्रति, और, आसपास,आदि  
  4. साधन वाचक :- जरिये, शेयर, बल, व्दारा,आदि   
  5. हेतुहेतु वाचक:-  लिए, वास्ते, निमित, करण, चलते, खातिर, हेतु ,आदि  
  6. विरोध वाचक :- विपरीत, खिलाफ,आदि   
  7. संग्रह वाचक:- लगभग, भर, तक, पर्यत,आदि    
  8. तुलना वाचक:- आगे, सामने, अपेक्षा, समक्ष,आदि    
  9. साहचर्य वाचक:-  अधीन,वश,  समेत, स्वाधीन, संग, साथ, सहित,आदि   
  10. विषय वाचक:-  नाम, बाबत, लेख, विषय, भरोशा,आदि   
  11. विनिय वाचक:- जगह, एवज, बदले ,पलते ,आदि    
  12. व्यतिरेक वाचक:- अतिरिक्त, वगैर, रहित, सिवा, विना,आदि     
  13. साद्रश्य वाचक:-  समान,बराबर, अनुसार, जैसा ,मुताविक, तुल्य,आदि   

प्रयोग के आधार पर:- प्रयोग के आधार पर ये दो  प्रकार के होते है

(1) संबद्ध संबंधबोधक
(2) अनुबद्ध संबंधबोधक
 
(1) संबद्ध संबंधबोधक:-ऐसे अव्यय शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के बाद आने बाले विभक्ति (का की के से )के बाद (पीछे) लागते है उन्हें संबद्ध संबंधबोधक कहते है। जैसे:-आगे,पीछे,बिना,समीप,दूर,ओर,पास,आदि  
  • माँ के बिना संसार अदूर है 
  • आपकी ओर मैं खड़ा हूँ।
  • भोजन के बिना भजन में मन नहीं लगता।
(2) अनुबद्ध संबंधबोधक :- यह अव्यय बगैर विभक्ति के आता है। जैसे:-
  • सीता सखियो सहित पुष्प वाटिका गयी
  • भोजन बिना भजन नहीं। 
  • आप बिन घर सूना।
  • वह कटोरे भर दूध पी गया।

व्युत्पति के आधार पर:-व्युत्पति के आधार पर ये दो  प्रकार के होते है

  1. मूल (मौलिक) संबंधबोधक
  2. यौगिक संबंधबोधक

मूल (मौलिक) संबंधबोधक:-ऐसे अव्यय शव्द जो अपने रूप में रहते है किसी अन्य शव्द के योग से नही बनते है उन्हें मूल या मौलिक संबंधबोधक कहते है |जैसे नाई, पूर्वक, बना, समान आदि 

  1. हम दोनो शांति पूर्वक पढ़ते है 
  2. मै जीवन पर्यत लेखन कार्य करता रहूँगा 

यौगिक संबंधबोधक:-ऐसे अव्यय शव्द जो संज्ञा सर्वनाम क्रिया क्रिया विशेषण आदि के योग से बनता है

समुच्चयबोधक किसे कहते हैं?

समुच्चयबोधक :- जो दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ता है, उसे समुच्चयबोधक कहते हैं। जैसे:- चूँकि,परन्तु,या, अथवा, किन्तु, और, क्योंकि,व,अतः, इसलिए एवं, तथा, कि,  जोकि, ताकि, हालाँकि,  लेकिन, आदि।
  • वरुण और सुरेश दोस्त हैं।    (दो शब्दों को)
  • हरीश आया और शीला ने रहीम को समझाया। (दो वाक्यों को)
  • सोहन छोटा है, परन्तु मोहन लम्बा है।
  • तुम परीक्षा में सफल हुए, क्योंकि रमेश ने  तुम्हें पढ़ाया था।
  • मैंने तुम्हें पढ़ाया, इसलिए तुम परीक्षा में सफल हुए। 

समुच्चयबोधक कितने प्रकार के होते है ?

समुच्चयबोधक दो प्रकार के होते है 
  1. समानाधिकार समुच्चयबोधक
  2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक
(1) समानाधिकार समुच्चयबोधक:- जो अव्यय दो मुख्य वाक्यों या एक ही प्रकार के दो संज्ञा को जोड़ता है। जैसे:- परन्तु, किन्तु, लेकिन, और, व, एवं, तथा, भी, या, अथवा, न-न, चाहे-चाहे, पर,इसलिए, अतएव  वरन्, बल्कि, अगर, मगर, अतः,  आदि।
उदाहरण : 
  • वरुण आएगा और रेखा की सहायता करेगा |(दोनों मुख्य वाक्यों को)
  • सलमान और आमिर आये।   (एक ही प्रकार के संज्ञा शब्दों को)
  • माता एवं पिता पूजनीय होते है 
  • दीपक  आया तरुण।
  • लकी  आया परन्तु अमन आया।
(2) व्यधिकरण समुच्चयबोधक :- जिन अव्यय शव्दों की मदद से किसी वाक्य के मुख्य वाक्य (प्रधान वाक्य ) में एक या एक से अधिक आश्रित  उपवाक्य जोड़े जाते है । जैसे :- अगरताकि,तो, यद्यपि,तथापि चूँकि, क्योंकि, इसलिए कि, जिससे कि, मानो, अर्थात्, यानी, आदि।
उदाहरण :-
  • मै  फ़िल्म देखने नही गया क्योंकि ऐसी फिल्मे मुझे पसंद नही है 
  • वह स्कूल न जा सका , क्योंकि वह बीमार था। (मुख्य वाक्य — आश्रित वाक्य)
  • यधपि मेने बी ए  किया, तथापि मै  अभी तक नौकरी में नहीं लगा ।
 
विस्मयादिबोधक किसे कहते हैं?
विस्मयादिबोधक :-  जिन अव्यय शब्दों से हर्ष, शोक, क्रोध, भय, आश्चर्य, घृणा आदि तीव्र मनोभाव व्यक्त होते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे:- आह, बाह, काश, शाबाश, ए, ऐं, बाप रे, राम-राम, छी-छी आदि।
उदाहरण :
वाह ! वाह ! हम जीत गये !  (हर्ष के भाव)
आह ! वह मर गया !  (शोक के भाव)
बाप रे ! कितना भयानक शेर !  (आश्चर्य के भाव)
विस्मयादिबोधक के भेद
:- विस्मयादिबोधक के निम्नलिखित प्रमुख भेद हैं
(1) हर्षसूचक :-  इससे हर्ष के भाव का बोध होता है।
जैसे :- वाह, वाह-वाह, धन्य, धन्य-धन्य, शाबाश आदि।
 
(2) शोकसूचक :- इससे शोक के भाव का बोध होता है।
जैसे :- अह, आह, ओह, हाय, काश, ऊह आदि।
 
(3) आश्चर्यसूचक:-  इससे आश्चर्य के भाव का बोध होता है।
जैसे:- ए, ऐ, ओहो, हैं, क्या, बाप रे आदि।
 
(4) घृणासूचक:-इससे घृणा के भाव का बोध होता है।
जैसे:- छिः, छी-छी, धिक्, धिक्कार, हट आदि।
 
(5) स्वीकारसूचक:- इससे स्वीकार के भाव का बोध होता है। जैसे — जी, हाँ, जी हाँ, ठीक, अच्छा आदि।
 
(6) संबोधनसूचक:-इससे कभी-कभी संबोधन भी व्यक्त होता है। जैसे — हे, अरे, अजी, भई आदि।