उच्च न्यायलय || हाईकोर्ट अनुच्छेद 214 ||

उच्च न्यायलय (अनुच्छेद 214)

  • संविधान के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय हुआ यह अनुच्छेद 214 में बताया गया है लेकिन संसद विधि द्वारा दो या दो से अधिक राज्यों और किसी संघ राज्य क्षेत्र के लिए एक ही उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है यह अनुच्छेद 231 में बताया गया है  वर्तमान में पंजाब एवं हरियाणा ,असम, नागालैंड, मिजोरम तथा अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा ,दादर और नागर हवेली और दमन तथा दीप और पश्चिम बंगाल ,अंडमान निकोबार दीप समूह आदि के लिए एक ही उच्च न्यायालय है
  • वर्तमान में भारत में  25 उच्च न्यायालय हैं तथा केंद्र शासित प्रदेशों में केवल दिल्ली में उच्च न्यायालय  है
  • प्रत्येक उच्च न्यायालय का गठन एक मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीशों से मिलकर किया जाता है तथा इसकी  नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा होती है यह अनुच्छेद 217  में बताया गया है लेकिन  भिन्न-भन्न न्यायालयों में न्यायाधीशों की संख्या अलग-अलग होती है

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए योग्यताएं

  1. भारत का नागरिक हो
  2.  कम से कम 10 वर्ष तक  न्यायिक पद धारण  कर चुका हो अथवा किसी उच्च न्यायालय में या एक से अधिक उच्च न्यायालय में लगातार 10 वर्षों तक अधिवक्त यानी वकील  रहा चुका हो 

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को शपथ तथा उम्र सीमा, त्याग पत्र 

  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उस राज्य जिसमें उच्च न्यायालय स्थित है का राज्यपाल उसके पद की शपथ दिलाता है
  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का अवकाश ग्रहण करने की अधिकतम उम्र सीमा 62 वर्ष है लेकिन प्रस्ताविक 65 वर्ष  है  उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपने पद से राष्ट्रपति को संबोधित कर कभी भी त्याग पत्र दे सकता है
  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उसी प्रकार अपदस्थ किया जा सकता है जिस प्रकार उच्च  न्यायालय का न्यायाधीश पद  मुक्त किया जाता है 
  • जिस व्यक्ति ने उच्च न्यायालय में स्थाई न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है वह उच्च न्यायालय में वकालत नहीं कर सकता है किंतु वह किसी दूसरे उच्च न्यायालय में अथवा उच्चतम न्यायालय में वकालत कर सकता है
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों  संख्या में वृद्धि
  • राष्ट्रपति आवश्यकतानुसार किसी भी उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या से वृद्धि कर सकता है अथवा अतिरिक्त न्यायाधीश की नियुक्ति कर सकता है
  • राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के किसी अवकाश प्राप्त न्यायधीश को भी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य करने का अनुरोध कर सकता है
  • उच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय होता है उसके निर्णय आधिकारिक माने जाते हैं तथा उनके आधार पर न्यायालय अपना निर्णय देता है यह अनुच्छेद 215 में वताया गया है 
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श कर राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के किसी भी न्यायाधीश का स्थानांतरण किसी दूसरे उच्च न्यायालय में कर सकता है
उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार
  • प्रारंभिक क्षेत्राधिकार:- प्रत्येक उच्च न्यायालय को  नोकाअधिकरण, इच्छा पत्र, तलाक, विवाह, न्यायालय की अबमानना तथा कुछ राज्यस्व संबंधित प्रकरणों  नागरिकों के मौलिक अधिकारों के क्रियान्वयन (अनुच्छेद 226) के लिए आवश्यक निर्देश विशेषकर बंदी प्रत्याक्षीकरण परमादेश निषेध उत्प्रेषण तथा अधिकार पृच्छा के लेख जारी करने के अधिकार प्राप्त हैं
  • अपीलीय क्षेत्राधिकार:- 1 फौजदारी मामले में अगर सत्र न्यायाधीश ने मृत्युदंड दिया हो तो उच्च न्यायालय में उसके विरूद्ध अपील हो सकती है 2 दीवानी मामले में उच्च न्यायालय में उन सब मामलों की अपील हो सकती है जो 5 लाख या उसके अधिक संपत्ति  संबंधित हैं 3 उच्च न्यायालय पर पेटेंट और डिजाइन, उत्तराधिकार, भूमि प्राप्ति,  दिवालियापन और संरक्षकता आदि मामले में भी अपील सुनता है
  • उच्च न्यायालय में मुकदमो  का हस्तांतरण:- यदि किसी उच्च न्यायालय को ऐसा लगे कि जो अभीयोग अधीनस्थ न्यायालय में विचाराधीन है यह विधि के किसी सारगर्भित प्रश्न  से संबंध है तो वह उसे अपने यहां हस्तांतरित कर या तो उसका निपटारा स्वयं कर देता है या विधि से संबंधित प्रश्न को निपटा कर अधीनस्थ न्यायालय को निर्णय के लिए वापस भेज देता है 
  • प्रशासकीय अधिकार:- उच्च न्यायालयो  को अपने अधीनस्थ न्यायालयों में पदावनती, पदोन्नति तथा छुट्टियों के संबंध में नियम बनाने का अधिकार है

ध्यान दें:- उच्च न्यायालय राज्य में अपील का सर्वोच्च न्यायालय नहीं है राज्य सूची से संबंधित विषयों में भी उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील हो सकती है

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