कारक किसे कहते हैं

कारक किसे कहते हैं?

कारक की परिभाषा:-

  • जिसका क्रिय से सीधा संबंध होता है उसे कारक कहते हैं
  • कारक क्र क्रिया से बना है
  • वाक्य में दिए गए संज्ञा सर्वनाम आदि शब्दों का क्रिया के साथ संबंध बताने वाले शब्दों को कारक कहते हैं
  • संबोधन कारक व कर्ता कारक दोनों कारकों में  प्रथम विभक्त का प्रयोग किया जाता है
  • कारक चिन्ह का दूसरा नाम परसर्ग भी होता है
  • किसी एक वाक्य में सभी कारक पाए जा सकते हैं

उदाहरण:- हे छात्र राम ने रावण को सीता के लिए लक्ष्मण की सहायता से अयोध्या से जाकर श्रीलंका में युद्ध करते हुए बाण से मार

कारक के कितने  भेद होते है ?

  • हिंदी भाषा में कारको को 8 प्रकार से वताया गया है 
  • संस्कृत में कारकों की संख्या 6 होती है क्योंकि संस्कृत में संबंध व संबोधन को कारक के अंतर्गत नहीं माना गया है
कारक विभक्तियाँ
कर्ता ने 
कर्म को 
करण से, व्दारा, के व्दारा   
सम्प्रदान को , के लिए 
अपादान से (अलग होने का भाव)
संबंध का, की, के, रा, री, रे 
अधिकरण में ,पे, पर 
संबोधन है! अरे ! अहो! ओ ! जी ! 

1 कर्ता कारक:- 

  • जो वाक्य में कार्य करता है, वह कर्ता कहलाता है। जिसमे कार्य को करने वाले का पता चलता है।कर्ता कारक का विभक्ति चिन्ह ‘ने’ होता है। 

उदाहरण:-

  • वरुण ने अपने बच्चों को पीटा।
  • पक्षी आकाश में उड़ते हैं
  • हरीश मथुरा जा रहा है।
  • नरेश खाना खाता है।
  • राम पुस्तक पढ़ता है
  • अरविन्द एक सुन्दर पत्र लिखा।

2. कर्म कारक :-

  • कर्ता के लिए जो सबसे अधिक पसंद हो उसे कर्म कारक कहते हैं
  • जब दो या दो से अधिक कार्य एक साथ किए जाएं तो उन्हें जो प्रधान अर्थात मान्य कर्म होता है उसे कारक माना जाता है तथा दूसरा कोई  आप्रधान कर्म का गॉड कर्म कहलाता है
  • जहां वाक्य में दोनों और चारों ओर निकट समीप आसपास अव्यव शब्दों का प्रयोग हो तो यह वाक्य कर्म कारक के कहलाते हैं
  • कर्म कारक का विभक्ति चिन्ह ‘को’ होता है।

उदाहरण:-

  • गोपाल ने राधा को बुलाया।
  • गांव के चारों ओर वृक्ष हैं
  • विद्यालय के दोनों ओर तालाब नदी पेड़ हैं
  • मेरे घर के आस पास  ही आपका घर है
  • राम ने रावण को मारा
  • मोर सांपों को खाता है
  • मधु ने घोड़े को पानी पिलाया।
  • मेरे दोस्त ने बच्चे को खाना खिलाया।
  • हमने कुत्तों को भगाया।

3. करण कारक:-

  • कर्ता  किसी कार्य अर्थात कर्म को संबोधित करने के लिए जिस माध्यम साधन हेतु कारण का प्रयोग करता है उसे करण कारक कहते हैं
  • शरीर के किस अंग में विकार अर्थात बीमारी होती है उसमें करण कारक होता है
  • वह साधन जिससे क्रिया होती है
  • करण कारक के दो विभक्ति चिन्ह होते है से और के द्वारा

उदाहरण:-

  • बच्चे गाड़ियों से खेल रहे हैं।
  • आपने रजिस्टर पर पेन से लिखा
  • पत्र को कलम से लिखा गया है।
  • मैं मेट्रो से अपनी कॉलेज जाता हूं
  • आपने पेड़ को कुल्हाड़ी से क्यों काटा
  • राम ने रावण को बाण से मारा।
  • तुलसीदास के द्वारा राम चरित्र मानस लिखा गया
  • मोहन पैर से लंगड़ा है
  • सोहन सिर से गंजा है
  • सुमित सारी जानकारी कितावो से लेता है।

4. सम्प्रदान कारक:-

  • जहां कोई वस्तु हमेशा हमेशा के लिए दी जाए जिसको वस्तु या पदार्थ दिया जाए उसमें संप्रदान कारक होता है
  • जो वस्तु रुचिकर हो या सबसे अधिक प्रिय हो तो उस वस्तु में संप्रदान कारक होता है जो पसंद की जाए
  • जो वस्तु  हमेशा के लिए दी जाए बदले में जिसके कुछ न लिया जाए जिसको वस्तु दी जाए उसमें संप्रदान कारक होता है
  • जो वस्तु दान दीक्षा भी शिक्षा भेंट गिफ्ट उपहार में दी जाए तो जिसको वस्तु उपर्युक्त स्थिति में दी जाए उसमें संप्रदान कारक होता है
  • सम्प्रदान का अर्थ ‘देना’ होता है।
  • सम्प्रदान कारक(चतुर्थ विभक्ति ) के विभक्ति चिन्ह के लिए या को हैं।

उदाहरण :-

  • बबीता अपनी बहन के लिए साड़ी लाई
  • रूस ने भारत को वैक्सीन की डोज के रूप में सहायता की
  • आप भात खाना ज्यादा पसंद करते हैं
  • राजा ने ब्राह्मणों को गाय दान में दी
  • दीपक ने वरुण को गाडी दी।
  • मैं घर को जा रहा हूँ।
  • रमेश मेरे लिए कोई उपहार लाया है।

5. अपादान कारक :-

  • जिससे कोई वस्तु पदार्थ हमेशा के लिए अलग हो जाए वहां अपादान कारक होता है
  • जिससे भय अर्थात्‌ डर लगे वहां अपादान कारक होता है
  • जिससे रक्षा की जाए वहां अपादान कारक होता है
  • जिससे नियम पूर्वक विद्या ग्रहण की जाए वहां अपादान कारक होता है
  • जिस तिथि दिन महीना वर्ष से कार्य का आरंभ होना पाया गया जाए वहां अपादान कारक होता है
  • जिससे सरमाया जाए वहां अपादान कारक होता है
  • अपादान कारक विभक्ति चिन्ह से होता है। 

उदाहरण :-

  • पेड़ से पत्ते गिरते हैं
  • लूटा मेज के नीचे गिरा
  • कुछ लोग घर से बाहर खड़े हैं
  • मुझे असफलता से डर लगता है
  • आप मेरी को रोना से रक्षा कर
  • अर्जुन ने द्रोणाचार्य से नियम पूर्वक धनुष विद्या ग्रहण की
  • गंगा हिमालय से निकलती है
  • सुरेश छत से गिर गया।
  • सांप बिल से बाहर निकला।
  • पृथ्वी सूर्य से बहुत दूर है।
  • आसमान से बिजली गिरती है।

6. संबंध कारक:-

  •  किसी  व्यक्ति / वस्तु या संज्ञा व सर्वनाम  से  संबंध वतने बाले शब्दों को संबंध कारक कहते है
  • सम्बन्ध कारक के विभक्ति चिन्ह का, के, की,रा, रे, री, ना, ने, नो,  आदि होते है 

उदाहरण:-

  • वह राम का बेटा है।
  • यह सुरेश की बहन है।
  • बच्चे का सिर दुःख रहा है।
  • यह सुनील की किताब है।
  • यह नरेश का भाई है।
7. अधिकरण कारक:-
  • आधार को अधिकरण कहा जाता है
  • जहां कार्य संपन्न होता है उसे आधार कहते हैं यह आधार अधिकरण कहलाता है
  • अधिकरण कारक के दो भेद होते हैं पहला काला अधिकरण दूसरा स्थान अधिकरण

कालधिकरण :- समय के रूप में आधार सेकंड, मिनट, घंटा, साल, प्रतिदिन, रोज, हर, रोज, महीना, रात,

स्थानाधिकरण:-  स्थान जगह के रूप में आधार जैसे मेज, पेड़, किताब, छत, कुर्सी, विद्यालय,

  • अधिकरण कारक सप्तमी विभक्ति का है
  • कारक चिन्ह या परसर्ग जैसे मैं पे पर

उदाहरण:-

  • पक्षी पेड़ पर बैठे हैं
  • बंदर दीवार पर चढ गया
  • आप छत पर क्या कर रहे थे
  • विद्यालय में आज अवकाश है
  • वह रोज़ सुबह गंगा किनारे जाता है।
  • वह पहाड़ों के बीच में है।
  • मनु कमरे के अंदर है।
  • महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ था।
  • फ्रिज में आम रखा हुआ है।
8. संबोधन कारक:-
  • जिसको याद किया जाए जिसका स्मरण हो प्रार्थना भजन पुकारा जाए जिस पर चिल्लाया जाए उसमें संबोधन कारक होता है और इसमें प्रथम विभक्ति होती है
  • संबोधन बिना करता कि नहीं किया जाता है अतः करता में विभक्ति प्रथमा होती है जिसके कारण संबोधन प्रथमा विभक्ति होगी 
  • सम्बोधन कारक की पहचान करने के लिए ! यह चिन्ह लगाया जाता है।
  • सम्बोधन कारक के  हे,ओ, अरे,  आदि विभक्ति चिन्ह  का प्रयोग होता है 

उदाहरण :-

  • हे छात्रों ! राम ने रावण को सीता के लिए  बाण से मारा था
  • हे भगवान ! मैं पास हो जाऊं
  • हे राम ! बहुत बुरा हुआ।
  • अरे भाई ! हम तो बहुत दिनों में आये।
  • अरे बच्चों! शोर मत करो।
  • हे बच्चों ! आप निरंतर पढ़ाई करो
  • हे ईश्वर ! इन सभी नादानों की रक्षा करना।
  • अरे ! यह इतना बड़ा हो गया।

 

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