न्यायपालिका(सर्वोच्च न्यायलय या उच्चतम न्याययल)

सर्वोच्च न्यायालय (उच्चतम न्याययल)

  • भारत की न्याय व्यवस्था अकेहरी और एकीकृत है जिस के सर्वोच्च शिखर पर भारत का सर्वोच्च न्यायालय है सर्वोच्च न्यायालय वर्तमान में दिल्ली में स्थित है
  • सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना गठन अधिकारिता शक्तियों के विनियमन से संबंधित विधि निर्माण की शक्ति भारतीय संसद को प्राप्त है सर्वोच्च न्यायालय का गठन संबंधी प्रावधान अनुच्छेद 124 में बताया गया है
  • सर्वोच्च न्यायालय
  • सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 8 न्यायाधीशों की व्यवस्था संविधान में मूल तक की गई थी बाद में काम के बढ़ते दबाव को देखते हुए 1956 ईस्वी में सर्वोच्च न्यायालय अधिनियम में संशोधन कर न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 11 कर दी गई बाद में 1960 ईस्वी में यह संख्या बढ़ाकर 14 कर दी  गयी तथा 1978 ईस्वी में बढ़ाकर 18 तथा 1986 में इसे बढ़ाकर 26 और 2009 में इसे 31 कर दी गई लेकिन वर्तमान में 34 संख्या है जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य 33 न्यायाधीश हैं

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीशो की नियुक्ति एव आयु सीमा  

  • न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है 
  • सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने के लिए न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई एक बार नियुक्ति होने के बाद इनके अवकाश ग्रहण करने की आयु सीमा 65 वर्ष है यानी 65 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद यह अवकाश ग्रहण कर लेंगे

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश न्यायाधीशों को पद से हटाए जाना

  • सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को साबित कदाचार तथा असमर्थता के आधार पर संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत पारित करके समावेदन के आधार पर राष्ट्रपति के द्वारा हटाया जा सकता है
  • सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को 2.80 लाख प्रतिमाह व अन्य न्यायाधीशों को ₹2.50लाख  प्रति माह वेतन मिलता है
  • सबसे कम समय तक मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहने वाले न्यायाधीश कमल नारायण सिंह जो (25 नवंबर 1991 से 12 दिसंबर 1991 तक) यानी 17 दिन तक  मुख्य न्यायाधीश रहे थे
  • सबसे अधिक समय तक मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहने वाले न्यायाधीश यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ थे जो 22 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985 तक यानी 2696 दिन तक यह न्यायाधीश रहे थे 
  • ध्यान दें:- जब भारतीय न्याय पद्धति में लोक हित मुकदमा लाया गया तब उस समय भारत के मुख्य न्यायाधीश पी.एन भगवती थे 
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए योग्यताएं
  1. वह भारत का नागरिक हो
  2. न्यायधीश वनने के लिए  वह किसी उच्च न्यायालय या दो या दो से अधिक न्यायालयों में लगातार कम से कम 5 वर्षों तक न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुका हो अथवा किसी उच्च न्यायालय या न्यायालयों में लगातार 10 वर्षों तक अधिवक्ता यानी वकील रह चुका हूं या राष्ट्रपति की नजर में कानून का उच्च कोटि का ज्ञाता हो
  • सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अवकाश प्राप्त करने के बाद भारत में किसी भी न्यायालय या किसी भी अधिकारी के सामने वकालत नहीं कर सकता है
  • सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद एवं गोपनीयता की शपथ राष्ट्रपति दिलाता है
  • मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति लेकर दिल्ली के अतिरिक्त अन्य किसी स्थान पर सर्वोच्च न्यायालय की बैठक में बुला सकता है अब तक हैदराबाद और श्रीनगर में  बैठक का आयोजन किया जा चुका है
सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार

1 प्रारंभिक क्षेत्राधिकार:- यह निम्न मामलों में प्राप्त है

  1. भारत संघ तथा एक या एक से अधिक राज्यों के मध्य उत्पन्न विवादों में
  2.  भारत संघ तथा कोई एक राज्य या अनेकों राज्यों और एक या एक से अधिक राज्यों के बीच विवादों में
  3.  दो या दो से अधिक राज्यों के बीच ऐसे विवाद में जिसमें अनेक वैधानिक अधिकारों का प्रश्न निहित हो
  4. प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार के अंतरगतिसर्वोच्च न्यायलय उसी विवाद को निर्णय की लिए स्वीकार करेगा जिसमे किसी तथ्य या विधि का प्रश्न शामिल है | 

2 अपीलीय क्षेत्राधिकार:-देश का सबसे बड़ा अपीलीय न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय है इसे भारत के सभी उच्च न्यायालयों के निर्णय के विरुद्ध अपील सुनने का अधिकार है इसके अतिरिक्त तीन प्रकार के प्रकरण आते हैं

  1.  संवैधानिक
  2.  दीवानी
  3.  फौजदारी

3  परामर्शदात्री क्षेत्र अधिकार:- राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह सार्वजनिक महत्व के विवादों पर सर्वोच्च न्यायालय का परामर्श यानी सलाह मांग सकता है यह अनुच्छेद 143 में बताया गया है न्यायालय के परामर्श को स्वीकार करना या अस्वीकार करना राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करता है

4  पुनर्विचार संबंधित क्षेत्र अधिकार:- संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय को यह अधिकार प्राप्त है के वह स्वयं द्वारा दिए गए आदेश या निर्णय पर पुनर्विचार कर सकता है तथा यदि उचित समझे तो उसमें आवश्यक परिवर्तन कर सकता है

5 अभिलेख न्यायालय:- संविधान का अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय का स्थान प्रदान करता है इसका आशय यह है कि  इस न्यायालय के निर्णय सब जगह साक्षी के रूप में माने जायेगे और इसकी प्रामाणिकता के विषय में प्रश्न नहीं किया जाएगा

6  मौलिक अधिकार का रक्षक:- भारत का सर्वोच्च न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारो का रक्षक है अनुच्छेद 32 सर्वोच्च न्यायालय को विशेष रूप से उत्तरदायी   ठहराता है कि  वह मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें न्यायालय मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध ,अधिकार पृच्छा-लेख और उत्प्रेषण के लेख जारी कर सकता है

ध्यान दे:- 

  • सर्वोच्च न्यायालय में संविधान के निर्वाचन से संबंधित मामलों की सुनवाई करने के लिए न्यायाधीशों की संख्या कम से कम पांच होनी चाहिए यह अनुच्छेद 145 (3 ) में बताया गया है 
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