भारत की संचित निधि (अनुच्छेद 266)

संचित निधि, लोक लेखा एवं आकस्मिक निधि

संविधान में तीन तरह की  निधियों  का चर्चा हुई है 

  1. भारत की संचित निधि (अनुच्छेद 266) 
  2. भारत की आकस्मिकता निधि
  3. भारत का लोकलेखा 

(1)भारत की संचित निधि

  • भारत सरकार को प्राप्त सभी राज्यों जैसे आयकर, निगम कर, सीमा शुल्क, उत्पादन शुल्क, ट्रेजरी बिल, जारी करके लिया गया ऋण आंतरिक एवं बाह्य उधार दिए गए ऋण की अदायगी  से प्राप्त राशि आदि की एक निधि है जिसे भारत की संचित निधि कहा जाता है अर्थात जिस तरह आम नागरिक अपने पैसे कहीं रखता है, उसी तरह सरकार भी अपने पैसे किसी खास जगह रखता है, उसे ही संचित निधि कहा जाता है,संविधान का अनुच्छेद 266(1), भारत के लिए और भारत के राज्यों के लिए संचित निधि की व्यवस्था करता है।
  • इसी तरह राज्य के बारे  में, ये राज्य की बड़ी निधि होती है जो कि राज्य विधानमंडल के अधीन होती है, और कोई भी धन इसमें बिना विधानमंडल की पूर्व (पहले)स्वीकृति के निकाला या जमा या भारित नहीं किया जा सकता है
  • इसी तरह से राज्यों के लिए इस प्रकार निधियाँ होती है।

संचित निधि से धन का कैसे निकाले  

  • संचित निधि में से कोई धनराशि संसद द्वारा  विनियोग विधेयक पारित कर दिए  जाने के बाद ही निकाली या व्यय की जा सकती है अन्यथा नहीं यह अनुच्छेद 114(3) में बताया गया है विनियोग विधेयक को हर हालत में नए वित्तीय वर्ष के प्रारंभ 1 अप्रैल से पहले पारित करा लेती है किंतु कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जब बजट प्रक्रिया 1 अप्रैल से पहले संपन्न नहीं हो पाती हैं इसके लिए जब तक बजट प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती उस दौरान व्यय के लिए लेखानुदान पारित कर धन की व्यवस्था की जाती है यानी लेखानुदान सरकार के खर्च पक्ष से संबंधित होता है जो बजट प्रक्रिया पूरी ना होने के चलते व्यय की व्यवस्था करने के लिए पारित किया जाता है लेखा अनुदान का प्रावधान स्थायी  एवं अस्थायी  दोनों प्रकार की सरकारों के द्वारा किया जा सकता है
  • भारत के लोक वित्त पर संसदीय नियंत्रण की विधियां पहला संसद के सम्मुख वार्षिक वित्तीय विवरण का प्रस्तुत किया जाना वित्तीय वर्ष के संदर्भ मे संसद के दोनों सदन के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण करवाएगा दूसरा विनियोजन विधेयक के पाद होने के बाद ही भारत की संचित निधि से मुद्रा निकाल पा ना भारत की संचित निधि से सिर्फ राशि तभी निकाली जा सकती है जब इसके लिए विनियोग विधेयक को पारित करा लिया जाए 

संचित निधि से व्यय

संचित निधि पर भारित व्यय:- संचित निधि से दो प्रकार का व्यय होता है

इसके लिए संसद में मतदान नहीं होता है क्योंकि संसद को ये पता होता है कि ये धन खर्च करनी ही पड़ेगी। ऐसा इसीलिए क्योंकि ये पहले से संसद द्वारा तय कर दिया गया होता है। हालांकि उस पर चर्चा जरूर होती है। भारित व्यय में निम्नलिखित व्यय आते हैं

1.राष्ट्रपति का वेतन  एवं भत्ते तथा उसके कार्यालय के अन्य व्यय
2. उप-राष्ट्रपति, राज्यसभा का उपसभापति लोकसभा का अध्यक्ष ,लोकसभा के उपाध्यक्ष के वेतन एवं भत्ते
3 उच्च न्यायलय  के न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते एवं पेंशन,एव पेंशन 
5. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के वेतन,भत्ते एवं पेंशन
6. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के वेतन, भत्ते एवं पेंशन
7.उच्चतम न्यायालय, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के कार्यालय एवं संघ लोक सेवा आयोग के कार्यालय के प्रशासनिक व्यय, जिनमें इन कार्यालयों में कार्यरत कर्मियों के वेतन, भत्ते एवं पेंशन भी शामिल होते हैं
8. ऐसे ऋण भार, जिनका दायित्व भारत सरकार पर है, जिनके अंतर्गत ब्याज, निक्षेप, निधि भार और तथा उधार लेने और ऋण सेवा और ऋण मोचन से संबन्धित अन्य व्यय हैं,
9. किसी न्यायालय के निर्णय, डिक्री या पंगर की तुष्टि के लिए अपेक्षित राशियाँ
10.संसद  द्वारा विहित कोई अन्य व्यय

ध्यान दें:- चुनावी वर्ष में लोकसभा के विघटन से पहले और नई सरकार के गठन होने तक वित्तीय वर्ष के एक भाग के लिए खर्च की व्यवस्था के लिए अंतरिम बजट का प्रावधान किया जाता है लेखानुदान और अंतरिम बजट के बीच अंतर यह है कि लेखानुदान पारित करने का कारण खर्च के लिए धन की व्यवस्था करना होता है और जबकि अंतरिम बजट में खर्च एवं प्राप्ति ओं दोनों का विवरण होता है अंतरिम बजट सामान्य बजट से इस रूप में अलग होता है कि उसे चुनावी वर्ष में नई सरकार के गठन तक की अवधि के लिए किया जाता है आगे नई सरकार अपने हिसाब से बजट प्रस्तुत करती है

 

(2) भारत की आकस्मिकता निधि (अनुच्छेद 267) 

  • संविधान का  अनुच्छेद(267)संसद और राज्य बिधन मंडल को यथास्थित ,भारत या राज्य की आकस्मिकता निधि सर्जित करने की शक्ति देता है 
  • यह निधि भारत की आकस्मिकता अधिनियम 1950 ई  के व्दारा गठित की गयी है यह निधि कार्य पालिका के व्यवनाधीन है 
  • जब तक विधान मंडल अनुपूरक अतिरिक्त अतिरिक्त या अधिक अनुदान व्दारा ऐसे व्यय को प्राधिकृत नही करता है तब तक समय समय पर अनवेक्षित व्यय करने के प्रयोजन के लिए कार्य पालिका इस निधियो से अग्रिम धन दे सकती है इस निधि में कितनी रकम हो यह समुचित विधान मंडल विनियमित करेगा  
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