भारतीय राज्यों का पुनर्गठन || Reorganization of Indian States In Hindi ||2022

 

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राज्यों का पुनर्गठन (The reorganisation of states)

भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन उचित है या नहीं इसकी जांच के लिए संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश एसके धर की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय आयोग की नियुक्ति की इस आयोग ने भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का विरोध किया और प्रशासनिक सुविधा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन का समर्थन किया

एस के धर आयोग के निर्णय की जांच करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति ने अपने जयपुर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू वल्लभभाई पटेल और पट्टाबी सीता रमैया की एक समिति का गठन किया इस समिति ने भी भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन की मांग को खारिज कर दिया

 

नेहरू पटेल एवं सीतारामय्या जे.बी.पी समिति की रिपोर्ट के बाद मद्रास राज्य के तेलुगू भाषाओं ने पोट्टी श्री रामुल्लू के नेतृत्व में आंदोलन प्रारंभ हुआ  58 दिन के आमरण अनशन के बाद 15 दिसंबर 1992 ईस्वी को रामुल्लू की  मृत्यु हो गई

पोट्टी श्री रामुल्लू की मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री नेहरू ने तेलुगू भाषाओं के लिए पृथक आंध्र प्रदेश के गठन की घोषणा कर दी 1 अक्टूबर 1953 ईस्वी को आंध्र प्रदेश राज्य का गठन हो गया यह स्वतंत्र भारत के में भाषा के आधार पर गठित होने वाला पहला राज्य था उस समय आंध्र प्रदेश की राजधानी कर्नूल  थी

आयोग के अध्यक्ष

राज्य पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष फजलअली थे इसके अन्य सदस्य सरदार के. एम पणिक्करऔर पंडित हृदयनाथ कुंजरू थे राज्य पुनर्गठन अधिनियम जुलाई 1956 ईस्वी में पास किया गया इसके अनुसार भारत में 14 राज्य एवं 6 केंद्र शासित प्रदेश स्थापित किए गए राज्य पुनर्गठन आयोग 1953 में गठित हुआ था

नवंबर 1954 ईस्वी को फ्रांस की सरकार ने अपनी सभी बस्तियों पुदुचेरी य नाम चंद्रनगर और केरी कल को भारत को सौंप दिए 28 मई 1956 ईस्वी को इस संबंध में संधि पर हस्ताक्षर हो गए इसके बाद इन सभी को मिलाकर पांडिचेरी संघ राज्य क्षेत्र का गठन किया गया

भारत सरकार ने 18 दिसंबर 1961 ईस्वी को गोवा, दमन व दीव की मुक्ति के लिए पुर्तगालियों के विरुद्ध कार्यवाही की और उन पर पूर्ण अधिकार कर लिया 12 में संविधान संशोधन द्वारा गोवा, दमन व दीव को प्रथम परिशिष्ट में शामिल करके भारत का अभिन्न अंग बना लिया गया

वर्तमान समय में भारत में 28 राज्य एवं 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं इन्हें ही संविधान की प्रथम अनुसूची में शामिल किया गया है

क्षेत्रीय परिषद

क्षेत्रीय परिषद भारत में 5 क्षेत्रीय परिषद हैं इनका गठन राष्ट्रपति के द्वारा किया जाता है और केंद्रीय गृह मंत्री या राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत केंद्रीय मंत्री क्षेत्रीय परिषद का अध्यक्ष होता है संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री उपाध्यक्ष होते हैं जो प्रतिवर्ष बदलते रहते हैं यह केंद्र राज्य संबंधों को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

क्षेत्रीय परिषद को 1956 ईस्वी के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था अतः यह सांविधिक निकाय है किंतु यह संवैधानिक निकाय नहीं है उत्तरी क्षेत्र परिषद पंजाब हरियाणा हिमाचल प्रदेश राजस्थान जम्मू कश्मीर राज्य तथा चंडीगढ़ एवं दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र

पूर्वोत्तर परिषद इसका गठन संसदीय अधिनियम पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम 1971 द्वारा किया गया है यह 8 अगस्त 1942 में अस्तित्व में आया इसके सदस्यों में असम मणिपुर मिजोरम अरुणाचल प्रदेश नागालैंड मेघालय त्रिपुरा तथा सिक्किम सम्मिलित है 1954 में सिक्किम पूर्वोत्तर परिषद का आठवां सदस्य बना इसका कार्य कुछ अतिरिक्त कार्यवाही सहित वही है जो छात्र परिषद के है