राज्य का महाधिवक्ता (Advocative General Of State) भारतीय संविधान

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राज्य का महाधिवक्ता (The Advocative General Of State) 

जिस प्रकार संविधान द्वारा भारत सरकार को विधिक मामलों पर सलाह देने के लिए अनुच्छेद 76 के तहत भारत के महान्यायवादी द अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया का प्रावधान किया गया है ठीक उसी प्रकार राज्यों को विधिक सलाह देने के लिए अनुच्छेद 165 के तहत महाधिवक्ता का प्रावधान किया गया है महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है

राज्य का महाधिवक्ता राजनीतिक कानूनी संवैधानिक विधायी प्रशासनिक कार्य में अंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है उसे राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही में भाग लेने तथा बोलने का अधिकार होता है इसके अलावा उसे उन सभी समितियों की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार होता है जिसका वह सदस्य होता है लेकिन इसमें से किसी भी समिति में मतदान देने का अधिकार नहीं है उसे सभी प्रकार केविधायी  विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं जो विधान मंडल के सदस्यों को प्राप्त होते हैं

राज्य के महाधिवक्ता से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तत्व जैसे नियुक्ति, कार्यकाल, वेतन , शक्तियां एवं कार्य

(1) राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति:

  • राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल किसी ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करता है जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता रखता हो अर्थात अनुच्छेद 217 (3) के अनुसार कोई व्यक्ति किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के योग्य होगा यदि वह भारत का नागरिक हो तथा कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर धारण किए हो या कम से कम 10 वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता यानी वकील के रूप में कार्य किया हो 

(2) राज्य के महाधिवक्ता का कार्यकाल:

  • संविधान के द्वारा राज्य के महाधिवक्ता के कार्यकाल निश्चित नहीं बताया गया है लेकिन राज्यपाल अपनी इच्छा के अनुसार महाधिवक्ता को उसके पद पर बनाए रख सकता है जब चाहे उसे पद से हटा सकता है अर्थात महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पर अपने पद पर बना रहता है

(3) राज्य के महाधिवक्ता के कार्य:

  1. राज्य के महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है जिसके निम्न कार्य है 
  2. राज्य सरकार को विधिक मामलों पर सलाद देना जो राज्यपाल द्वारा दिए गए हैं अर्थात विधि संबंधी ऐसे सब विषयों पर राज्य सरकार को परामर्श देना जिन पर राज्यपाल उससे परामर्श मांगे इसके अतिरिक्त उसका कार्य कानून से संबंधित उन सब कार्यों को करना भी है जो राज्यपाल समय समय पर उसे सौंपी या जिसे पूरा करने का दायित्व संविधान या किसी अन्य विधि द्वारा उसे सौंपा गया हो
  3. संविधान या किसी अन्य विधि द्वारा प्रदान किए गए कर्तव्य का निर्वहन करना
  4. राज्य सरकार से संबंधित मामलों को लेकर उच्च न्यायालय में राज्य सरकार की ओर से पेश करना अर्थात राज्य सरकार की ओर से कार्य करना
  5. राज्य का महाधिवक्ता राज्य सरकार के विरुद्ध न्यायालय में आने वाले मामलों में सरकार की ओर से पक्ष रखता है वह स्वतंत्र रूप से भी गैर सरकारी मुकदमा लड़ सकता है लेकिन जिन मामलों पर वह सरकार को सलाह दिया है उन मामलों में वह सरकार के विरुद्ध नहीं खड़ा हो सकता इसके साथ-साथ राज्य सरकार की अनुमति के बिना वो किसी आपराधिक मामले में अभियुक्त के पक्ष में न्यायालय में नहीं खड़ा हो सकता और ना ही किसी निजी कंपनी के निदेशक का पद धारण कर सकता है

(4) राज्य के महाधिवक्ता का अधिकार:

  1.  उसे राज्य विधानसभा के कार्यवाही में बात करने का हिस्सा लेने का अधिकार है लेकिन मतदान बोट करने का अधिकार नहीं है
  2.  अपने सरकारी कर्तव्यों के निष्पादन में उसे राज्य में किसी भी अदालत में सुनवाई का अधिकार है
  3.  उसे राज्य विधानसभा जिसमें उसे सदस्य के रूप में नामित किया गया है बात करने या किसी समिति की बैठक में हिस्सा लेने का अधिकार है लेकिन वह मतदान करने का अधिकार नहीं रखता है
  4.  वह सभी विशेष अधिकारों और प्रतिरक्षा ओं को प्राप्त कर सकता है जो राज्य विधानसभा के एक सदस्य के लिए जरूरी होती हैं

राज्य का महाधिवक्ता क्या नहीं कर सकता है?

  1. वह उन विषयों में कोई बहस नहीं कर सकता है जिन मामलों में उसे राज्य सरकार की ओर से पेश होना है
  2.  किसी मामले में राज्य सरकार के विरुद्ध किसी व्यक्ति को कोई सलाह नहीं दे सकता है
  3.  महाधिवक्ता राज्य सरकार का कोई नियमित नौकरशाह नहीं है उसे आवश्यकता अनुसार राज्य सरकार द्वारा बुलाया जाता है अतः वह न्यायालयों में अपनी निजी वकालत जारी रख सकता है
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