विधान सभा Legislative Assembly क्या है ? भारतीय संविधान | 2022

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विधान सभा (Legislative Assembly)

जिस प्रकार संसद में लोकसभा और राज्यसभा होते हैं ठीक उसी प्रकार राज्य की विधान मंडल में भी विधान सभा (legislative Assembly) और विधान परिषद होते हैं लेकिन विधान परिषद वैकल्पिक है क्योंकि कोई भी राज्य अपने इच्छा अनुसार विधानमंडल का हिस्सा बना भी सकता है और नहीं भी बना सकता है

आज हम इस पोस्ट में विधानसभा और विधान परिषद पर सरल और सहज चर्चा करेंगे एवं इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझेंगे

विधान सभा (legislative Assembly) विधानमंडल का प्रथम और लोकप्रिय सदन है इसे निम्न सदन भी कहते हैं यह विधान परिषद से अधिक शक्तिशाली होता है क्योंकि इसमें प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि आते हैं

प्रत्येक राज्य में विधाई कार्यों को संपादन के लिए विधानसभा (legislative Assembly) का प्रावधान किया गया है केंद्र शासित प्रदेशों में केवल दिल्ली पुदुचेरी और जम्मू कश्मीर में विधानसभा स्थापित हुई है

विधान सभा (legislative Assembly) का गठन (अनुच्छेद 170)

  • विधान सभा का गठन विधायकों (जिन्हें एमएलए भी कहा जाता है) से होता है इन प्रतिनिधियों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से वयस्क मताधिकार के द्वारा किया जाता है किसी राज्य के विधान सभा में कितनी सीट होनी चाहिए इसके लिए जनसंख्या को पैमाना माना जाता है और उसी के अनुसार किसी राज्य में अधिक से अधिक 500 और कम से कम 60 सीटें हो सकती हैं परंतु इसके कुछ अपवाद हैं जैसे अरुणाचल प्रदेश(30) सिक्किम(30) एवं गोवा (30) के मामले में यह न्यूनतम संख्या 30 है एवं मिजोरम व नागालैंड के मामले में क्रमशः 40 व 46 है इसके अलावा सिक्किम और नागालैंड विधान सभा में कुछ सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से भी चले जाते हैं जब के सबसे बड़ी विधानसभा उत्तर प्रदेश की है क्योंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा (legislative Assembly) की 403 सीट हैं
विधान सभाओ के निर्वाचित सदस्यों की संख्या 
क्र:स राज्यों के नाम  कुल सदस्य(निर्वाचित )  अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित स्थान  अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित स्थान 
उत्तर प्रदेश 403 88 1
2 आंध्र प्रदेश 175 25 10
3 असम 126 08 16
4 बिहार 243 48 28
5 गुजरात 182 13 26
6 हरियाणा 90 17
7 कर्नाटक 224 33 02
8 केरल 140 13 01
9 मध्य प्रदेश 230 34 72
10 महाराष्ट्र 288 18 22
11 मणिपुर 60 19
12 मेघालय 60 59
13 नागालैंड 60 59
14 उड़ीसा 147 22 34
15 पंजाब 117 29
16 राजस्थान 200 34 25
17 तमिल नाडु 234 43 03
18 त्रिपुरा 60 07 17
19 पश्चिम बंगाल 295  59 17
20 सिक्किम 32 02 12
21 मिजोरम 40 39
22 अरुणाचल प्रदेश 60 39
23 गोवा 40 01
24 छत्तीसगढ़ 90 10 29
25 उत्तराखंड 70 04
26 झारखंड 81 08 28
27 तेलंगाना 119 14 05
28 हिमाचल प्रदेश  68 10 03

सघ शासित प्रदेश :-  

क्र:स सघ शासित प्रदेश कुल सदस्य(निर्वाचित ) अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित स्थान  अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित स्थान 
1 पुदुचेरी 30 5
दिल्ली 70
3 जम्मू कश्मीर 70

विधान सभा (legislative Assembly)के सदस्यों का निर्वाचन

  • जनवरी 2020 से पहले तक राज्यपाल एंग्लो इंडियन समुदाय में से एक सदस्य को नामित यानी निर्वाचित कर सकता था लेकिन अब इसे समाप्त कर दिया गया है 
  • विधानसभा को कई चुनाव क्षेत्रों में उसे आवंटित सीटों के अनुसार बांट दिया गया है सभी निर्वाचन क्षेत्रों को समान प्रतिनिधित्व मिले इसलिए निर्वाचन क्षेत्रों को जनसंख्या के आधार पर बांटा गया है इसके लिए सन 1971 के जनगणना के आधार पर नियम वनाया  पहले तो 1976 के 42 वें संविधान संशोधन के द्वारा एस आधार वर्ष को साल 2000 तक के लिए स्थिर कर दिया गया फिर 84 में संविधान संशोधन 2001 के जनगणना के अनुसार इससे आगे और 25 वर्ष बढ़ा दिया गया यानी 2026 तक 1971 वाली जनसंख्या ही उपयोग में लाई जाएगी

अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण

  • संविधान में राज्य की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर प्रत्येक राज्य की विधानसभा के लिए अनुसूचित जाति व जनजाति की सीटों की व्यवस्था की गई है मूल रूप से यह आरक्षण 10 वर्ष के लिए था यानी 1960 तक लेकिन इस व्यवस्था को हर बार 10 वर्ष बढ़ा दिया गया लेकिन अब 104 वे संविधान संशोधन 2020 द्वारा इसे 2030 तक बढ़ा दिया गया है
विधान सभा का कार्यकाल
  • यह लोक सभा की तरह विधानसभा भी निरंतर चलने वाला सदन नहीं है प्रथम बैठक की तिथि से 5 वर्ष का होता है लेकिन इस अवधि के पहले भी मुख्यमंत्री के परामर्श पर वह राज्यपाल द्वारा भंग की जा सकती है
  • यदि राष्ट्रीय आपातकाल के समय संसद द्वारा विधानसभा का कार्यकाल एक समय में 1 वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है लेकिन यह विस्तार आपातकाल खत्म होने के बाद 6 महीने से अधिक का नहीं हो सकता अर्थात आपातकाल समाप्त हो जाने पर 6 महीने के भीतर विधानसभा का दोबारा चुनाव हो जाना चाहिए

पदाधिकारी

  • प्रत्येक राज्य की विधान सभा के दो मुख्य पदाधिकारी होते हैं अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
  • इन दोनों का चुनाव विधान सभा के सदस्य अपने सदस्यों में से ही करते हैं तथा इनका कार्यकाल विधानसभा के कार्यकाल तक होता है अध्यक्ष अपना त्यागपत्र उपाध्यक्ष को तथा उपाध्यक्ष अपना त्यागपत्र अध्यक्ष को सौंप सकते हैं अर्थात यह दोनों अपना त्यागपत्र आपस में एक दूसरे को दे सकते हैं इन दोनों को विधानसभा सदस्यों के साधारण बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर हटाया जा सकता है किंतु इस प्रकार के प्रस्ताव की सूचना 14 दिन पहले अध्यक्ष या उपाध्यक्ष जिनके विरुद्ध प्रस्ताव हो को देना आवश्यक है
  • अध्यक्ष को पद से हटाए जाने का प्रस्ताव लंबित है तो वह निर्णायक मतदान नहीं कर सकता है बल्कि विधानसभा सदस्य के रूप में अपना मतदान करेगा विधानसभा भंग हो जाने पर भी अध्यक्ष अपने पद पर उस समय तक बना रहता है जब तक के नई विधान सभा की प्रथम बैठक ना हो इन दोनों ही पदाधिकारियों को राज्य विधान मंडल द्वारा निर्धारित वेतन भत्ते तथा अन्य सुविधाएं प्राप्त होती हैं
विधान सभा (legislative Assembly) अध्यक्ष की निम्नलिखित अधिकार एवं कार्य
  • विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार तथा कार्य लोकसभा अध्यक्ष के समान ही है जो संक्षेप में निम्न है पहला वह विधान सभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है और सदन की कार्यवाही का संचालन करता है
  •  वह सदन में शांति और व्यवस्था बनाए रखता है
  •  वह सदन की कार्यवाही को स्थगित या निलंबित कर सकता है
  •  वह कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं इसका निर्णय अध्यक्ष करता है
  • वह किसी प्रश्न पर मतदान कर सकता है और परिणाम की घोषणा करता है
  • यदि किसी प्रश्न पर पक्ष या विपक्ष में बराबर मत आए हो तो वह निर्णायक मत का प्रयोग कर सकता है
  • वह सदन की कार्रवाई से ऐसे शब्दों को निकालें जाने का आदेश दे सकता है जो और असंसदीय अशिष्ट हैं
  •  सदन के नेता के परामर्श से वह सदन की कार्यवाही का क्रम निश्चित कर सकता है
  • वह प्रश्नों को स्वीकार करता है या नियम विरुद्ध होने पर उन्हें अस्वीकार करता है
  •  सदन का कोई भी सदस्य सदन में उसकी आज्ञा से ही भाषण दे सकता है
  • सदन तथा राज्यपाल के बीच अध्यक्ष की संपर्क स्थापित करता है
  • वह सदन के सदस्यों के विशेष अधिकारों की रक्षा करता है
  • वह विधानमंडल की कुछ समितियों का पदेन सभापति होता है
  • वह सदन की दर्शक दीर्घा में दर्शकों और प्रेस प्रतिनिधियों के प्रवेश पर नियंत्रण भी लगा सकता है 

ध्यान दें:- 

यदि अध्यक्ष की अनुपस्थिति में इन सभी कार्यों का संपादन उपाध्यक्ष करता है यदि दोनों ही अनुपस्थित हो तो विधानसभा अपने सदस्यों में से कार्यवाहक अध्यक्ष चुन लेती है

विधानसभा (legislative Assembly)से समानता
  • विधानसभा निम्न मामलों में परिषद की शक्तियों एवं स्थिति को बराबर माना जा सकता है
  • राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश को स्वीकृति
  •  मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों का चयन:- संविधान के अंतर्गत मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों को विधानमंडल के किसी एक सदन का सदस्य होना चाहिए और अपनी सदस्यता के बावजूद भी केवल विधानसभा के प्रति उत्तरदायी  होते हैं
  •  साधारण विधायकों को पुनर्स्थापित और पारित करना यद्यपि दोनों सदनों के बीच असहमति की स्थिति में विधानसभा ज्यादा शक्तिशाली होती है
  •  संवैधानिक निकायों जैसे राज्य वित्त आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग, एवं भारत के नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टओं पर विचार करना
  •  राज्य लोक सेवा आयोग के न्याय क्षेत्र में वृद्धि
विधान सभा से असमानता
  • निम्न मामलों में परिषद की शक्ति एवं स्थिति विधानसभा से अलग है
  • वित्त विधेयक सिर्फ विधानसभा में पुनः स्थापित किया जा सकता है
  • विधान परिषद वित्त विधेयक में संशोधन किया जा सकता है और ना ही इसे अस्वीकार किया जा सकता है इसे विधानसभा को 14 दिन के अंदर सिफारिश के साथ या बिना सिफारिश के भेजना होता है
  • विधानसभा परिषद की सिफारिशों को स्वीकार करना या अस्वीकार करना दोनों मामलों में वित्त विधेयक दोनों सदनों द्वारा पास माना जाता है
  • कोई विधेयक वित्त विधेयक है या नहीं यह तय करने का अधिकार विधानसभा के अध्यक्ष को होता है
  • एक साधारण विधेयक को पास करने का अंतिम अधिकार विधानसभा को ही है कुछ मामलों में परिषद से अधिकतम 4 माह के लिए रोक  सकती है पहली बार विधेयक को तीन महा और दूसरी बार में 1 माह के लिए रोका जा सकता है अर्थात परिषद राज्यसभा की तरह पुनरीक्षण निकाय भी नहीं है यह एक विलंबकारी चेबर या परामर्शी निकाय मात्र है
  • परिषद बजट पर सिर्फ बहस कर सकती है लेकिन अनुदान की मांग पर मत नहीं कर सकती यह विधानसभा का विशेष अधकार है
  • परिषद  अविश्वास प्रस्ताव पारित कर मंत्री परिषद को नहीं हटा सकती है ऐसे  इसीलिए है क्योंकि मंत्री परिषद की सामूहिक जिम्मेदारी विधानसभा के प्रत्यय है लेकिन विधान परिषद राज्यपाल के क्रियाकलापों और नीतियों पर बहस और आलोचना कर सकती है
  • जब एक साधारण विधेयक परिषद में आया हो और सभा में भेजा गया हो यदि सभा अस्वीकृत कर दे तो विधेयक खत्म हो जाता है
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