संविधान किसे कहते है | परिभाषा | लिखित संविधान | अलिखित संविधान | विशेषताएं

संविधान की परिभाषा :-

  • संविधान किसे कहते है ? कोई सा भी  देश का संविधान वह मौलिक कानून व्यवस्था  है जो सरकार के विभिन्न अंगों की सरंचना , कार्य का  निर्धारण तथा नागरिको को  संरक्षण भी करता है।
  • विश्व में सबसे पहले लिखित संविधान संयुक्त राज्य अमेरिका ने बनाया , तथा संसार में सबसे बड़ा लिखित संविधान भारत ने बनाया  है।
  • भारत राज्यों का एक संघ है और  एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक गणराज्य भी है।।

भारतीय संविधान सभा की पहली  बैठक(9 dec 1946 )को हुई और इसके  अस्थायी अध्यक्ष श्री सच्चिदानंद सिन्हा को निर्वाचित किया गया था|और दूसरी बैठक (11 dec 1946 ) और उसके अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष बनाया गया था, सविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर  थे और 26 जनवरी 1950 को  पूरे सविंधान को पूरे देश में लागू कर दिया था |

किसी देश द्वारा के लिए गए वह नियम जिसके द्वारा से संस्था का अछे तरीके से संचालन हो सके उस देश का उसे संविधान कहा जाता है।

भारत का संविधान, संविधान सभा द्वारा 26 जनवरी 1950 को पूर्ण रूप से संपूर्ण देश में लागू कर दिया गया था। संविधान के दो प्रकार होते हैं, एक अलिखित संविधान और दूसरा लिखित। विश्व का प्रथम लिखित संविधान  अमेरिका का है,लेकिन संसार का सबसे बड़ा लिखित संविधान भारत का है।

वर्तमान में, भारत के  संविधान में  470 अनुच्छेद जो 25 भागों और 12 अनुसूचियों में लिखित है। जिस समय संविधान लागू हुआ था, उस समय 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचि और 22 भाग थे। संविधान में समय के हिसाब से परिवरतन किया जाता है जिसे संशोधन कहते  हैं।

लिखित संविधान किसे कहते है :-

  •  लिखित संविधान एक औपचारिक दस्तावेज है, जो संवैधानिक समझौते की प्रकृति, राजनीतिक व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले नियमों और नागरिकों एवं सरकारों के अधिकारों को एक सही  रूप में परिभाषित करता है। जिसका अधिकतर  भाग लिखित होता है।
  • संविधान किसी देश को अच्छी तरह से संचालित करनें के लिए बनाया जाता है जोकि  लिखित दस्तावेज होता है। लिखित संविधान का निर्माण किसी विशेष सविंधान सभा के द्वारा  से किया जाता है।
  • संविधान देश का सर्वोच्च कानून व्यवस्था होती है। इसलिए, व्यक्तियों के अधिकार सामान्य कानून के तहत न्यायिक सुरक्षा पर निर्भर रहते हैं।

अलिखित संविधान किसे कहते है? :-

  • अलिखित संविधान उन विचार, नियमों, रीति-रिवाजों अथवा लोक- प्रथाओं एवं परंपराओं के समूह को कहते हैं, जिनसे उस देश की शासन व्यवस्था चलाई जाती है।
  • अलिखित संविधान का मतलब है की उस देश में सविंधान लिखित ना होकर मौखिक रूप से ही पुरे देश पर लागू किया जाता है और देश की जनता उसका पालन करती है |
  • ब्रिटेन ही एक ऐसा देश है, जिसका संविधान अलिखित है ।

भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं :-

  •  प्रत्येक देश में संविधान अपनी अपनी अलग अलग  विशेषताएं रखता  है, जिनकी सहायता से उस देश की पूर्ण  व्यवस्था की  जानकारी प्राप्त कर सकते है।
  • भारतीय संविधान का निर्माण एक विशेष संविधान सभा के द्वारा किया गया है, हमारी पूरी सविंधान सभा ने पहले सभी देशो का सविधान पडा फिर उन सभी सविन्धानो में से अच्छी अच्छी बातो को अपने सविंधान में लिखा।

भारत का संविधान लिखनें में 2 वर्ष 11 महीनें 18 दिन का समय लगा था।

  • संविधान किसी भी देश का एक  मौलिक कानून है जो सरकार के विभिन्न अंगों की संरचना और कार्य करने का सही और सुचारू तरीका है। और  यह सरकार और देश के नागरिकों के बीच अछे संबंध को  स्थापित करता है।

1. सबसे बड़ा लिखित संविधान :-

  • भारतीय संविधान पूरे  विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। जो 26 जनवरी 1950 को पूर्ण रूप से  लागू किया गया था। वर्तमान में अब  संविधान में कुल 470 अनुच्छेद (25 भागों में विभक्त) तथा 12 अनुसूचियां, एक प्रस्तावना तथा 5 परिशिष्ट हैं।
  • भारतीय संविधान में कुल 177369 शब्द शामिल किये गये  हैं। भारतीय संविधान को बड़ा बनाने का मुख्य कारण उसका विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र भी  (लगभग 32,87,263 वर्ग किलोमीटर) है।  

2. संविधान में लचीलेपन और कठोरता का समावेश :- 

  • भारतीय संविधान कठोरता व लचीलेपन के सम्मिश्रण का अनूठा उदाहरण है। यह , जापान स्विट्जरलैंड और फ्रांस अमेरिका,  जैसे देश की तरह ना तो बहुत कठोर है ना ही ब्रिटेन व इजरायल की तरह बहुत लचीला है।
  • भारतीय का संविधान लचीलेपन और कठोरता का  मिश्रण है।
  • भारत के संविधान में संशोधन की एक निश्चित प्रक्रिया है।
  • यह संशोधन सदन के दोनों सदनों के कुल सदस्यों तथा प्रत्येक सदन के दो-तिहाई उपस्थित सदस्यों के मतदान के द्वारा पारित किया जाता है।

3. विभिन्न स्रोतों से निर्मित संविधान:

  • भारतीय संविधान के निर्माण में देश और विदेशी स्त्रोत लिए गया हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारतीय शासन अधिनियम 1935 का है।
  • भारतीय संविधान के निर्माण में लगभग 250 अनुच्छेदों को भारत सरकार अधिनियम 1935 से लिया गया है। इसके अतिरिक्त 60 देशो के संविधान के प्रावधानों को भी इसमें शामिल किया गया है।

4. धर्मनिरपेक्ष देश:-

  • धर्मनिरपेक्ष देश शब्द का अर्थ यह है, कि भारत में मौजूद सभी धर्मों को देश में एक समान संरक्षण और समर्थन मिलेगा।
  • इसके  अनुसार सरकार का कोई अपना धर्म नहीं होगा वह सभी धर्मो को सामान ताबज्जू देगी।

5. सरकार का संसदीय स्वरूप:-

  • संविधान के अनुसार भारत में सरकार का संसदीय स्वरूप है।
  • संसदीय प्रणाली लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की वह प्रणाली है, जिसमें कार्यपालिका अपनी लोकतान्त्रिक वैधता विधायिकता (संसद) से प्राप्त करती है तथा विधायिकता के प्रति उत्तरदायी होती इस प्रकार संसदीय प्रणाली में कार्यपालिका और विधायिका परस्पर सम्बन्धित होते हैं।
  • भारत में दो सदनों लोकसभा और राज्य सभा वाली विधायिका है।
  • सरकार के संसदीय स्वरूप में, विधायी और कार्यकारिणी अंगों की शक्तियों में कोई स्पष्ट अंतर नहीं है।
  • भारत में सरकार का मुखिया प्रधानमंत्री होता है।( रियल अथॉरिटी )
  • भारत का मुखिया राष्ट्रपति होता है|(नोमिनल अथॉरिटी )

6. एकल नागरिकता :-

  • यद्यपि भारतीय संविधान संघीय है और इसने दोहरी राजपद्धति (केंद्र एवं राज्य) को अपनाया है, लेकिन इसमें केवल एकल नागरिकता की व्यवस्था की गई है जो की केंद्र द्वारा दी गयी है – भारतीय नागरिकता।
  • विश्व के लगभग 90 देशों में दोहरी नागरिकता है, जिसमें व्यक्ति पास  एक साथ दो देशों की नागरिकता होती है।

7. एकीकृत और स्वतंत्र न्यापालिका:- 

  • भारत का संविधान एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका प्रणाली प्रदान करता है। भारत का सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट है।
  • सुप्रीम कोर्ट को सभी न्यायलय का सर्वोच्च है , सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बनाये गए नियम निचले न्याय पालिका पर काम करते है |
8. मौलिक कर्तव्य :-
  • भारत के लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करना जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग आधारित सभी प्रकार के भेदभाव से परे हो।
  • साथ ही ऐसी प्रथाओं का त्याग करना जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं।
9. आपातकाल के प्रावधान;-
  • देश में आपातकाल की घोषणा भारत के राष्ट्रपति द्वारा स्थिति को देखते हुए कर सकते हैं आपातकाल घोषित करने से पहले राष्ट्रपति को कैबिनेट से लिखित रूप में सिफारिश लेनी पड़ती है। अर्थात राष्ट्रपति स्वयं के निर्णय से आपातकाल घोषित नहीं कर सकते है।
  • आपातकाल लागु होने के बाद सभी राज्य पूर्ण रूप से केंद्र सरकार के आधीन हो जाते है। गम्भीर स्थितियो को देखते हुए आपातकाल को पुरे देश या कुछ राज्ये में लगाया जा सकता है।
10. सार्वभौम व्यस्क मताधिकार :-
  • देश में रहने वाले वयस्क अर्थात 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी नागरिकों को अपनें मताधिकार का प्रयोग करनें का अधिकार प्राप्त है।
  • उसके साथ जाति, धर्म, वंश, लिंग, साक्षरता आदि को लेकर किसी तरह का भेद-भाव नहीं किया जा सकता।  
  • मताधिकार के संबंध में संपत्ति, लिंग या शिक्षा को लेकर किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
  • इस समय विश्व के लगभग देशों में सार्वभौम व्यस्क मताधिकार की व्यवस्था है।
  • सार्वभौम व्यस्क मताधिकार के माध्यम से सामाजिक असमानता दूर होनें के साथ ही देश के प्रत्येक नागरिक के लिए राजनीतिक समानता के सिद्धांत को बनाए रखता ह

 

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