Important Articles of Indian Constitution ||संविधान के प्रमुख अनुच्छेद

संविधान के प्रमुख अनुच्छेद

आज हम आपके को  भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद बता रहे हैं जो किसी ना किसी  प्रतियोगिता परीक्षा में एक प्रश्न जरूर पूछा जाता है इस पोस्ट में आपको भारतीय संविधान  के सभी महत्वपूर्ण अनुच्छेद  के बारे में बताया  गया |

संघ और उसके  राज्य  क्षेत्र (Union and Its territory )

  • अनु -1 संघ का नाम और राज्य क्षेत्र| यह उपबंधित करता है कि भारत अर्थात् इण्डिया राज्यों का संघ(Union of States) होगा |
  • अनु. -2 नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना |
  • अनु .3 नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों ,सीमाओ या नामों में परिवर्तन ‘‘( इसके अंतर्गत संसद को साधारण बहुमत से विधेयक पास कर किसी नये राज्य का निर्माण और किसी वर्तमान राज्यों  के क्षेत्र ,सीमा या नाम में परिवर्तन का अधिकार है )  

नागरिकता (Citizenship )

  • अनु .5 संविधान के प्रारम्भ पर नागरिकता 
  • अनु. 6 पाकिस्तान को  भारत को प्रवजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकों के  अधिकार | 
  •  अनु. 7 पाकिस्तान को प्रवजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार | 
  • अनु. 8भारत के बाहर रहने वाले भारतीय उद्दभव के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार |
  • अनु. 9 विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना | 
  • अनु .10 नागरिकता के अधिकारों को बताया गया |
  • अनु. 11   संसद द्वारा  नागरिकता के अधिकार का विधि द्वारा  विनियम किया जाना |” संसद ने इस अनु.द्वारा  प्रदन्त शक्ति के प्रयोग में भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 बनाया  है | 

मूल अधिकार (Fundamental Right )

  • अनु. 12  भाग तीन के प्रयोजनों के लिए राज्य ‘शब्द को परिभाषित किया गया है |
  •  अनु. 13  मूल अधिकारों से असंगत या उनके अल्पीकरण करने वाली विधियों का शून्य होना |

I  समता का अधिकार (Right to Equality )

  • अनु. 14  विधि के समक्ष समता तथा विधियों का समान संरक्षण | 
  • अनु. 15  धर्म ,मूलवंश ,जाती ,लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद कर प्रतिषेध| 
  • अनु. 16  लोक नियोजन के विषयों  में अवसर की समता | 
  • अनु. 17  अर्स्पश्यता का अंत |
  • अनु. 18 उपाधियो का अंत |

II स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom )

  • अनु. 19  वाक -स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण |
  • अनु. 20  अपराधो के लिए दोषसिध्दी के सम्बन्ध में संरक्षण |
  • अनु. 21  प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण | 
  • अनु.21 (क) बालकों (6 से 14 वर्ष )को शिक्षा का अधिकार सम्विधान संशोधन (86 वे संविधान संशोधन )अधिनियम ,2002 ,व्दारा अंत:स्थापित है | 
  • अनु. 22 कुछ दशाओ में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण |

III शोषण के विरुध्द  अधिकार (Right Against Exploitation ) 

  • अनु. 23 मानव के दुर्व्यापर और बलात्तश्रम का प्रतिषेध |   
  • अनु. 24 कारखानों आदि में बालको के नियोजन का प्रतिषेध (14 वर्ष तक के बालको लागू)

IV धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom Religion )

  • अनु. 25  अन्तः करण की और धर्म के अबाध रूप से मानने आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता|
  • अनु. 26 धार्मिक कार्यो में  प्रबंध की स्वतंत्रता |
  • अनु .27 किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करो के संदाय के बारे में स्वतंत्रता |
  • अनु. 28 कुछ शिक्षा संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्वतंत्रता |

V  संस्क्रति  और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार (Cultural and Education Rights ) 

  • अनु. 29 अल्पसंख्यक -वर्गो के हितों का संरक्षण |
  • अनु . 30 शिक्षा संस्थायो की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक -वर्गो का अधिकार | 
  • अनु . 31  सम्पति का अनिवार्य अर्जन (44 वे संविधान संशोधन अधिनियम 1978 द्वारा निरसित )

VI  संविधान उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies)

  • अनु .32  भाग तीन द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार |इस अनु . द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार को डॉ.भीमराव अम्बेडकर ने संविधान की आत्मा कहा है | 
  • अनु. 33 भाग तीन द्वारा प्रदत्त अधिकारों का बलों आदि को लागू होने में उपान्तरण करने की संसद की शक्ति |
  • अनु. 34 जब किसी क्षेत्र में सेना विधि प्रवर्त्त है तब भाग तीन द्वारा प्रदत्त अधिकारों पर निर्बन्धन |
  • अनु. 35 भाग तीन के उपबंधो को प्रभावी करने के लिए विधान |(अस्पर्श्यता  तथा बलातश्रम के लिए संसद ने इस अनु. के तहद दण्ड का प्रावधान किया है |)

राज्य की निति के निदेशक तत्व (Directive Principals of state policy )

  • अनु. 36 इसमें यह कहा गया है कि अनु. – 12 में दी गयी ‘राज्य’ शब्द की परिभाषा भाग चार अर्थात् नीति निर्देशक तत्वों के लिए भी लागू होगी | 
  • अनु. 37 भाग -4 में अंतर्विष्ट तत्वों का लागू होना अर्थात् राज्य का यह कर्तव्य है कि वह भाग इस में अंतर्विष्ट तत्वों को ,विधि बनाते समय लागू करे , किन्तु यह किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है | 
  • अनु. 38 राज्य लोक कल्याण की अभिव्रध्दी के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा |
  • अनु. 39 राज्य द्वारा अनुसरणीय कुछ निति तत्व |
  • अनु. 39( क,) समान न्याय और नि: शुल्क विधिक सहायता (42 वै संविधान संशोधन अधि. 1976  द्वारा अन्त:स्थापित ) 
  • अनु. 40 ग्राम पंचायतो का संगठन |
  • अनु. 41 कुछ दिशायों में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार | 
  • अनु. 42 काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबन्ध|
  • अनु. 43 कर्मकारो के लिए निर्वाह मजदूरी आदि |
  • अनु. 43( क )उधोगों के प्रबन्ध में कर्मचारी का भाग लेना | (42 वे सं.संशो. अधिनियम द्वारा अन्त: स्थापित )
  • अनु.43( ख) -संविधान 97 वाँ संशोधन (2011) द्वारा अंत: स्थापित |
  • अनु. 44 नागरिको के लिए एक समान सिविल संहिता |
  • अनु.45 आरम्भिक शिशुत्व देख-रेख तथा 6 वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए निः शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का उपबन्ध (86 वे संविधान संशोधन अधिनियम 2002 द्वारा प्रतिस्थापित |
  • अनु. 46 अनुसूचित जातियों , अनुसूचित जनजातियो और अन्य दुर्बल वर्गो की शिक्षा और अर्थ सम्बन्धी हितों की अभिव्र्धि | 
  • अनु. 47 पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करने तथा लोक स्वास्थ्य में सुधार करने का राज्य का कर्तव्य |
  • अनु. 48 कृषि और पशु पालन का संगठन |
  • अनु.48 (क) पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा | (42 वे सं. संशो .अधिनियम द्वारा अन्त:स्थापित )
  • अनु. 49 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों , स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण |
  • अनु. 50 कार्यपालिका से न्यायपालिका का प्र्थक्करण |
  • अनु. 51 अंतर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा की अभिव्र्धि |
  • अनु. 51 -(क) मूल कर्तव्य (स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर, 42 वे संविधान संशो. अधि. 1976 द्वारा अंत:अस्थापित |) 

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति (The President and Vice-President )

  • अनु -52 भारत का राष्ट्रपति  
  • अनु -53 संघ की कार्यपालिका शक्ति
  • अनु -54 राष्ट्रपति का  निर्वाचन 
  • अनु -55 राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति 
  • अनु -56 राष्ट्रपति की पदावधि 
  • अनु 57 पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता 
  • अनु -58 राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताए 
  • अनु -59 राष्ट्रपति के पद के लिए शर्ते ; यथा -संसद या किसी राज्य के विधानमंडल का सदस्य न होने तथा कोई लाभ का पद धारण न करना |   
  • अनु -60 राष्ट्रपति व्दारा शपथ या प्रतिज्ञान 
  • अनु 61 राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रकिया 
  •  अनु -62 राष्ट्रपति के पद में रिक्ति  को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को  भरने के लिए निर्वाचन व्यक्ति की पदावधि 
  • अनु -63 भारत का उपराष्ट्रपति 
  • अनु -64  उपराष्ट्रपति का राज्य सभा का पदेन सभापति होना  
  • अनु-65  राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दोरान या उसकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना या उसके क्रत्यो  का निर्वहन  
  • अनु-66 उपराष्ट्रपति का निर्वचन 
  • अनु -67 उपराष्ट्रपति की पदावधि 
  • अनु -68 उपराष्ट्रपति के पद की रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन कराने का समय और आस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि 
  • अनु -69 उपराष्ट्रपति द्वारा  शपथ या प्रतिज्ञान और शपथ का प्रारूप 
  • अनु -70 अन्य आकस्मिकताओ में राष्ट्रपति के र्कत्यो का निर्वहन   
  • अनु -71 राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से सम्बन्धित या संसक्त विषय 
  • अनु -72 क्षमा आदि की और कुछ मामलो में दण्डादेश के निलम्बन ,परिहार ,लघुकरण की राष्ट्रपति की शक्ति 
  • अनु -73 संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार 

मंत्रि -परिषद्  (Council of Ministers )

  • अनु-74 राष्टपति की सहायता और सलाह देने के लिए मंत्री -परिषद् 
  • अनु -75 मंत्रियों के बारे में अन्य उपबन्ध 

भारत की महान्यायवादी (The Attorney General of India )  

  • अनु -76 भारत की महान्यायवादी |
  • अनु -77 भारत सरकार के कार्य का संचालन |इसके अनुसार भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्यवाहियाँराष्टपति के नाम से की जायेंगी |
  • अनु -78 राष्टपति को जानकारी देने आदि के सम्बन्ध में प्रधानमन्त्री के कर्तव्य 

संसद ( Parliament )

  • अनु -79 संसद का गठन 
  • अनु – 80 राज्यसभा की संरचना  
  • अनु – 81 लोकसभा की संरचना 
  • अनु – 82 प्रत्येक जनगणना के पश्चात राज्यों को लोकसभा में स्थानों का आवंटन व राज्यों का प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजन का पुनः समायोजन 
  • अनु – 83 संसद के सदनों की अवधि 
  • अनु – 84 संसद की सहायता के लिए अर्हता 
  • अनु – 85 संसद के सत्र , अत्रावसान और विघटन 
  • अनु – 86 सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राष्ट्रपति का अधिकार 
  • अनु – 87 राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण 
  • अनु – 88 सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के बोलने व भाग लेने (किन्तु मत न देने ) का अधिकार 

संसद के अधिकारी (Officers of Parliament)

  • अनु – 89 राज्य सभा का सभापति और उपसभापति  
  • अनु – 93 लोकसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष 
  • अनु – 97 सभापति और उपसभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन एवं भत्ते 

सदस्यों की निरर्हताए  (Disqualification of Members)

  • अनु- 102 सदस्यों के लिए निरर्हताए 
  • अनु- 103 सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय |यह विनिश्चय राष्ट्रपति , निर्वाचन आयोग की राज्य से करता है |
  • अनु-105 संसद के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियां , विशेषधिकार आदि 

विधायी प्रक्रिया (Legislative Procedure)

  • अनु-107 विधेयकों के पूर:स्थापन और पारित किए जाने के सम्बन्ध में उपबन्ध 
  • अनु- 108 कुछ दशायो में दोनों की संयुक्त बैठक 
  • अनु- 109 धन विधेयकों के सम्बन्ध में विशेष प्रक्रिया 
  • अनु- 110 धन विधेयक की परिभाषा 
  • अनु- 111 विधेयकों पर राष्ट्रपति की अनुमति 

वित्तीय विषयों के सम्बन्ध में प्रक्रिया (Procedure in Financial Matters)

  • अनु-112 वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट )
  • अनु- 113 संसद में प्राक्कलनों (Estimates ) के सम्बन्ध में प्रक्रिया  
  • अनु- 114 विनियोग विधेयक (Appropriation Bills)
  • अनु- 115 अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान 
  • अनु- 116 लेखानुदान, प्र्त्ययानुदान और अपवादानुदान  
  • अनु- 117 वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबन्ध 
  • अनु-120 संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा इसके अनुसार संसद में कार्य हिंदी या अंग्रेजी में किया जायेगा |
  • अनु- 121 संसद में चर्चा पर निर्बन्धन (उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के किसी न्यायधीश के आचरण के बारे में )
  • अनु-22 न्यायालयों द्वारा संसद की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना |
  • अनु- 123 संसद के विस्त्रान्तिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राष्ट्रपति की शक्ति 

संघ की न्यायपालिका (The Union Judiciary)

  • अनु-124 उच्चतम  न्यायालय की स्थापना और गठन 
  • अनु-125 न्यायधीशो के वेतन आदि 
  • अनु-126 कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति 
  • अनु- 127 तदर्थ न्यायमूर्तियो की नियुक्ति 
  • अनु- 128 उच्चतम न्यायालय की बैठकों में सेनानिव्रत्त न्यायधिशो की उपस्थिति 
  • अनु- 129 उच्चतम न्यायालय का अभिलेख न्यायालय होना 
  • अनु- 130 उच्चतम न्यायालय का स्थान 
  • अनु- 131 उच्चतम न्यायालय की आरम्भिक अधिकारिता 
  • अनु-136 अपील के लिए उच्चतम न्यायालय की विशेष इजाजत 
  • अनु-137 निर्णयों या आदेशों का उच्चतम न्यायालय द्वारा पुनर्विलोकन (Review)
  • अनु-138 उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता की वृध्दी 
  • अनु- 139 कुछ रिट निकालने की शक्तियों का उच्चतम न्यायालय को प्रदत्त किया जाना | 
  • अनु-141 उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित विधि का सभी न्यायालयों पर आबध्दकर होना 
  • अनु-143 उच्चतम न्यायालयों से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति 
  • अनु-145 न्यायालय के नियम आदि 
  • अनु-146 उच्चतम न्यायालय के अधिकारी और सेवक तथा व्यय 

भारत का निंयत्रक महालेखापरीक्षक  (Comptroller and Auditor General of India) 

  • अनु -148 भारत निंयत्रक महालेखा परीक्षक 
  • अनु -149 निंयत्रक  महालेखा परीक्षक के कर्तव्य और शक्तियाँ

राज्यपाल (The Governor)

  • अनु -153 राज्यों के राज्यपाल 
  • अनु -154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति 
  • अनु -155 राज्यपाल की नियुक्ति 
  • अनु -156 राज्यपाल की पदावधि 
  • अनु -157 राज्यपाल नियुक्त होने के लिए अर्हताएं 
  • अनु -158 राज्यपाल के पद के लिए शर्ते 
  • अनु -159 राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान 
  • अनु -160 कुछ आकस्मिकताओ में राज्यपाल के क्रत्यो का निर्वहन 
  • अनु -161 क्षमा आदि की और कुछ मामलो में दण्डादेश के निलंबन ,परिहार या लघुकरण की राज्यपाल की शक्ति  
  • अनु -162 राज्य की  कार्यपालिका शक्ति का विस्तार  
  • अनु -163 राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्री परिषद 
  • अनु -165  राज्य का महाधिवक्ता 
  • अनु -167 राज्यपाल को जानकारी देने के आदि के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य 
  • अनु -200 विधेयको पर अनुमति या राष्टपति के विचारार्थ आरक्षित 
  • अनु -201 विचार के लिए आरक्षित विधेयक पर राष्ट्रपति की कार्यवाही 
  • अनु -210 विधान मंडल में प्र्यिग की जानेवाली भाषा 
  • अनु -211 विधानमंडल में चर्चा पर निर्बन्धन 
  • अनु -213 विधानमंडल के विश्रातिकाल में अध्यादेश प्रख्यापति करने की राज्यपाल की शक्ति  

राज्यों के उच्च न्यायालय (The High Courts of States)

  • अनु-214 राज्यों के लिए उच्च न्यायालय 
  • अनु -215 उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना | 
  • अनु -216 उच्च न्यायालयो का गठन 
  • अनु -217 उच्चन्यायालय के न्यायधीश की नियुक्ति और उसके पद शर्ते 
  • अनु -218 उच्चम न्यायालय से सम्बधित कुछ उपबन्धों का उच्च न्यायालयों को लागू होना 
  • अनु -219 उच्च न्यायालयो के न्यायधीश द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान 
  • अनु -220 स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि व्यवसाय पर निर्बधन
  • अनु -221 न्यायधिशो के वेतन आदि 
  • अनु-222 किसी न्यायधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण |
  • अनु-223 कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति 
  • अनु-224  अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति 
  • अनु-224 (क) उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवा -निर्वन्त न्यायधिशो की नियुक्ति 
  • अनु-225 विघान उच्च न्यायालयों की अधिकारिता 
  • अनु-226 कुछ रिट निकालने की उच्च न्यायालय की शक्ति ,
  • अनु-226 (क) अनु. 226 के अधीन कार्यवाहियों में केन्द्रीय विधियों की संवैधानिक वैधान पर विचार न किया जाना |  
  • अनु -227 सभी न्यायालयों के अधिक्षण की  उच्च न्यायालय की शक्ति 
  • अनु-228 कुछ मामलों का उच्च न्यायालयको अंतरण |
  • अनु -230 उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्य क्षेत्रों पर विचार या अपवर्जन करने की संसद को शक्ति |
  • अनु-231 दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक ही  उच्च न्यायालयकी स्थापना की संसद को शक्ति |

संघ राज्य क्षेत्र (Union Territory)

  • अनु-239 संघ राज्य क्षेत्रो का प्रशासन 
  • अनु-239 (क) कुछ संघ राज्य क्षेत्रों के लिए स्थानीय विधानमण्डलों या मंत्रिपरिषदो का या दोनों का स्रजन 
  • अनु-239(क.क.) दिल्ली के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध  
  • अनु-240 कुछ संघ राज्य क्षेत्रों के लिए विनिमय बनने की राष्ट्रपति की शक्ति 
  • अनु-241 संघ राज्य क्षेत्रों के लिए उच्च न्यायालय 

ग्राम पंचायत एंव नगरपालिका (Village Council and Municipality) 

  • अनु-243 ग्राम पंचायत की परिभाषा 
  • अनु-243 (त )नगरपालिका की परिभाषा 

सहकारी समितियाँ 

  • अनु-243 य ज .सहकारी समितियों के अंतर्गत आने वाले विभिन्न पदों की परिभाषाएं 197वा सविंधान अधि०, 2011द्वारा अन्तः स्थापित 
  • अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र (Scheduled Castes Scheduled Tribes Territory)
  • अनु-244अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्रों का प्रशाशन 
  • अनु-144 (क) असम के कुछ जनजाति क्षेत्रों को समाविष्ट करने वाला एक श्वशाषी राज्य बनाना और उसके लिए स्थानीय विधानमंडलों या मंत्रिपरिषद का या दोनों का स्रजन |

संघ और राज्यों के बीच सम्बन्ध (Relations Between Union and the States) 

  • 1. विधायी सम्बन्ध (Legislature Relations)
  • अनु-245संसद द्वारा और राज्यों के विधान -मंडलो द्वारा बनाई गई विधियों का विस्तार 
  • अनु-246 संसद द्वारा और राज्यों के विधान -मंडलो द्वारा बनाई गई विधियों का विषय -वस्तु 
  • अनु-247 कुछ अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना का उपबन्ध करने की संसद की शक्ति 
  • अनु-246 (क) माल और सेवाकर के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध |101 वे संविधान संशोधन द्वारा अन्तः स्थापित  
  • अनु-248 अवशिष्ट विधायी शक्तिया 
  • अनु – 249 राज्य सूची में विषय के सम्बन्ध में राष्टीय हित में बनाने की संसद की शक्ति  
  • अनु – 250 यदि आपदा की उद्घोषणा प्रवर्तन में हो तो राज्य सूचि में विषय के सम्बन्ध में विधि बनाने की संसद की शक्ति 
  • अनु – 251 संसद द्वारा अनु. 249 और अनु. 250 के अधीन बनाई गई विधियों और राज्यों के विधान मंडलो द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति |
  • अनु – 252 दो या अधिक राज्यों के लिए उनकी सहमति से विधि बनाने की संसद की शक्ति और ऐसी विधि का किसी अन्य राज्य द्वारा अंगीकार किया जाना 
  • अनु- 253 अंतर्राष्ट्रीय करारों को प्रभावी करने के लिए विधान  
  • अनु – 254 संसद द्वारा बनाई गई विधियों और राज्यों के विधान-मंडलो द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति का प्रभाव 
  • अनु- 255 सिफारिशों और पूर्व मंजूरी के बारे मेअपेक्षाओ को केवल प्रक्रिया के विषय मानना  
  • अनु -257 कुछ दिशाओं में राज्यों पर संघ का नियन्त्रण 
  • अनु – 260 भारत के बाहर के राज्य क्षेत्रों के सम्बन्ध में संघ की अधिकारिता 
  • अनु – 262 अंतर्राज्यिक नदियों या नदी-दूनों के जल सम्बन्धी विवादों का न्यायनिर्णयन 
  • अनु- 263 अंतरराज्य परिषद के सम्बन्ध में उपबन्ध  
  • अनु – 265 विधि के प्राधिकार के बिना करों का अधिरोपण न किया जाना |
  • अनु – 268 संघ द्वारा उदग्रहित किए जाने वाले किन्तु राज्यों द्वारा संग्रहित और विनियोजित किए जाने वाले शुल्क 
  • अनु – 268 (क) संघ द्वारा उदग्र्हित किए जाने वाले संघ तथा राज्यों द्वारा संग्रहित और संविभाजित किए जाने वाले सेवा कर 
  • अनु -269  संघ द्वारा  उदग्र्हित और संग्रहित किन्तु राज्यों को सोंपे जाने वाले कर  
  • अनु -269 (क ) अंतर्राज्यिक व्यापार या वाणिज्य के अनुक्रम में माल और सेवाकर का उदुग्रहणऔर संग्रहंण |101 वाँ  संविधान अधिनियम 2016 द्वारा अन्तः स्थापित |  
  • अनु -270  संघ द्वारा  उदग्र्हित और संग्रहित तथा संघ और राज्यों के बीच वितरित किए जाने वाले कर 
  • अनु -271  कुछ शुल्को और करों पर संघ के प्रयोजनों के ले अधिभार 
  • अनु -274 ऐसे कराधान पर ,जिसमें राज्य हितबध्द है ,प्रभाव डालने वाले विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश की अपेक्षा 
  • अनु -275 कुछ राज्यों को संघ से अनुदान 
  • अनु -276 वृन्तियो ,व्यापरों ,आजीविकाओ और नियोजनों पर कर  
  • अनु -279 ”शुध्द आगम ”आदि की गणना 
  • अनु -279 (क) माल और सेवा कर परिषद | 101 वाँ  सम्विधान संशोधन अधिनियम ,2016 द्वारा अन्तः स्थापित | 
  • अनु -280 विन्त्त आयोग 
  • अनु -281  विन्त्त आयोग की सिफारिशे

सम्पति का अधिकार  (Right to Property)

  • अनु -300 (क) विधि के प्राधिकार के बिना व्यक्तियों को सम्पन्ति से वंचित न किया जाना | 

भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापर ,वाणिज्य और समागम  (Trade Commerce and Intercourse within the territory of India)

  • अनु -301 व्यापर ,वाणिज और  समागम की स्वतंत्रता 
  • अनु -302 व्यापर ,वाणिज और  समागम पर निर्बन्धन अधिरोपित करने की संसद की शक्ति 
  • अनु -303 व्यापर ,और वाणिज के सम्बन्ध में संघ और राज्यों की विधियी शक्तियों पर निर्बन्धन 
  • अनु -304 राज्यों के बीच व्यापर ,वाणिज और  समागम पर निर्बन्धन 
  • अनु -307 अनु.301 से अनु .304 के प्रयोजनों को कार्यन्वित करने के लिए प्राधिकारी की नियुक्ति |

संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ  (Services under the Union and the States)

  • अनु-309 संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्ते  
  • अनु-310 संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की पदावधि 
  • अनु-311 संघ या राज्य के अधीन सिविल हैसियत में नियोजित व्यक्तियों का पदच्युत किया जाना ,पद हटाया जाना या पंक्ति में अवनत किया जाना |
  • अनु -312 अखिल भारतीय सेवाएँ 

लोक सेवा आयोग (Public Service Commissions)

  • अनु -315 संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग 
  • अनु -316 सदस्यों सेवा नियुक्ति और पदावधि  
  • अनु -317 लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य का हटाया जाना और निंलबित किया जाना |
  • अनु -318आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने के सम्बन्ध में प्रतिषेध 
  • अनु -320 लोक सेवा आयोगों के कृत्य 
  • अनु -321 लोक सेवा आयोगों पर क्रत्यो का विस्तार करने की शक्ति 
  • अनु -322 लोक सेवा आयोगों के व्यय 
  • अनु -323 लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन 

निर्वाचन (Elections)

  • अनु -324 निर्वाचनो के अधिक्षण ,निदेशन और नियंत्रण का निर्वाचन आयोग में निहित होना | 
  • अनु -325 धर्म ,मूलवंश ,जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति का निर्वाचक -नामावली किए जाने के लिए अपात्र न होना और उसके द्वारा किसी विशेष निर्वाचक -नामावली में सम्मिलित किए जाने का दावा न किया जाना 
  • अनु-326 लोक सभा और राज्यों की वुधन सभाओं के लिए निर्वाचनो का वयस्क मताधिकार के आधार पर होना | 
  • अनु -327 विधान -मंडलो के लिए निर्वाचनों के सम्बन्ध में उपबंध करने की संसद की शक्ति 
  • अनु -328 किसी राज्य के विधान -मंडल के लिए निर्वाचनों के सम्बन्ध में उपबंध करने की उस विधान -मंडल किश्क्ति 
  • अनु -329 निर्वाचन सम्बन्धी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन 

कुछ वर्गो के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध (Special provisions relating to Certain Classes)

  • अनु -230 लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जन जातियों के लिए स्थानों का आरक्षण 
  • अनु -331 लोक सभा में आंग्ल भारतीय समुदाय का प्रतिनिधत्व 
  • अनु -332 राज्ञो की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण 
  • अनु -333 राज्यों की विधानसभाओं में आंग्ल -भारतीय का प्रतिनिधित्व  
  • अनु -334 स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का 70 वर्ष के पश्चात् न रहना (95 वे संविधान संशोधन अधि. 2009 द्वारा यथा- संशोधित )
  • अनु -335 सेवाओं और पदों के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावे 
  • अनु -336 कुछ सेवाओं में आंग्ल भारतीय समुदाय के लिए विशेष उपबन्ध 
  • अनु -337 आंग्ल भारतीय समुदाय के फायदे के लिए शेक्षिक अनुदान के लिए विशेष उपबन्ध 
  • अनु -338 राष्ट्रिय अनुसूचित जाति आयोग 
  • अनु -338 (क) राष्ट्रिय अनुसूचित जनजाति आयोग | 89 वे संविधान संशोधन अधि. 2003 द्वारा अन्तः स्थापित | 
  • अनु -338 (ख) राष्ट्रिय पिछड़ा वर्ग आवोग 102वा संविधान संशोधन अधिनियम , 2018 द्वारा अन्तः स्थापित |
  • अनु -339अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशाशन और अनुसूचित  जन जातियों के कल्याण के बारे में संघ का नियन्त्रण 
  • अनु -340 पिछड़े वर्गो की दशाओं के अन्वेषण के लिए आयोग की नियुक्ति 
  • अनु -341 अनुसूचित जातियाँ 
  • अनु -342 अनुसूचित जनजातियाँ 
  • अनु -342 (क)सामाजिक और शेक्षिक पिछड़ा वर्ग |102 वा संविधान संशोधन , 2018 द्वारा अन्तः स्थापित |

भाषा (Language)

  • अनु -343 संघ की राजभाषा 
  • अनु -344 राजभाषा के सम्बन्ध में आयोग और संसद की समिति 
  • अनु -345 राज्य की परिभाषा या राजभाषाएँ 
  • अनु -346 एक राज्य और दुसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा 
  • अनु -347 किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के सम्बन्ध में विशेष उपबंध 
  • अनु -348 उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों , विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा 
  • अनु -349 भाषा से सम्बन्धित कुछ विधियाँ अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया 
  • अनु -350 व्यथा के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा 
  • अनु-350 (क) प्राथमिक स्तर पर मात्रभाषा में शिक्षा की सुविधाएँ  
  • अनु -350 (ख ) भाषाई अल्पसंख्यक वर्गो के लिए अधिकारी   
  • अनु -351 हिन्दी भाषा के विकास के लिए निदेश 

आपात उपबन्ध (Emergency Provisions)

  • अनु -352 आपात की उद्घोषणा 
  • अनु -353 आपात की उद्घोषणा का प्रभाव 
  • अनु -354 जब आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में है तब राजस्वों के वितरण सम्बन्धी उपबन्ध का लागू होना 
  • अनु -355 बाहा आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्य की सुरक्षा करने का संघ  के कर्तव्य 
  • अनु -356 राज्यों के संविधानिक तन्त्र के विफल हो जाने की दशा में उपबन्ध 
  • अनु -357 अनु.-356 के अधीन की गई उद्घोषणा के अधीन विधायी शक्तियों का प्रयोग 
  • अनु -358 आपात के दोरान अनु.-19 के उपबन्धों का निलंबन 
  • अनु -359 आपात के दोरान भाग 3 द्वारा प्रदत अधिकारों के प्रवर्तन का निलंबन 
  • अनु -360 वित्तीय आपात के बारे में उपबन्ध 

प्रकीर्ण (Miscellaneous)

  • अनु -361 राष्ट्रपति, राज्यपालों और राज्य प्रमुखों का संरक्षण  
  • अनु -361 (क) संसद और राज्यों के विधान-मण्डलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण 
  • अनु -361 (ख) लाभप्रद राजनीति पद पर नियुक्ति के लिए निर्हरता 91 वा संविधान संशोधन अधिय्म , 2003 द्वारा अन्तः स्थापित | 
  • अनु -363 कुछ संधियों करारों आदि से उत्पन्न विवादों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन 
  • अनु- 365 संघ द्वारा दिए गए निदेशों का अनुपालन करने में या उनको प्रभावी करने में असफलता का प्रभाव 
  • अनु- 366 परिभाषाएं  

संविधान का संशोधन (Amendment of the Constitution)

  • अनु- 368 संविधान का संशोधन का करने की संसद की शक्ति और उसके लिए प्रक्रिया

अस्थायी ,संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध (Temporary, Transitional and Special Provisions)

  • अनु- 369 राज्य सूचि के कुछ विषयों के सम्बन्ध में विधि बनने की संसद की इस प्रकार अस्थायी शक्ति मानों वे समवर्ती सूची के विषय हों 
  • अनु- 371 महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध 
  • अनु-371 (क) नगालेंड राज्य के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध 
  • अनु- 371 (ख) असोम राज्य के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध 
  • अनु- 371 (ग)मणिपुर राज्य के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध 
  • अनु- 371 (घ) आंध्रप्रदेश राज्य के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध 
  • अनु- 371 (ड.)आन्ध्र प्रदेश में केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना 
  • अनु -371 (च)सिक्किम राज्य के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध 
  • अनु -371 (छ )मिजोरम राज्य के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध  
  • अनु -371(ज ) अरुणाचल प्रदेश राज्य के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध  
  • अनु -371(झ ) गोवा राज्य के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध  
  • अनु- 371 (ण ) कर्नाटक राज्य के  सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध |
  • अनु- 372 विघमान विधियों का प्रवर्त्त बने रहना और उनका अनुकूलन 
  • अनु-372 (क ) विधियों का अनुकूलन करने की राष्टपति की शक्ति 
  • अनु- 373 निवारक निरोध में रखे गए व्यक्तियों के सम्बन्ध में  कुछ दशाओं में आदेश करने की राष्ट्रपति की शक्ति
  • अनु – 392 कठिनाइयों को दूर करने की राष्ट्रपति की शक्ति 

संक्षिप्त नाम ,प्रारम्भ , हिन्दी में प्राधिक्रत पाठ और निरसन (Commencement, Authoritative Text in and Repeals)

  • अनु- 393 संक्षिप्त नाम -इस संविधान का संक्षिप्त नाम भारत का संविधान है |
  • अनु-394 यह अनु. संविधान के लागू (In force) होने के बारे में वतता  है |इसके  अनुसार अनुच्छेद  — 5 , 6 , 7, 8, 9, 60, 324, 366, 367, 379, 380, 388, 391, 392, 393, तथा स्वंय 394 (कुल -16 )जोड़े गये और  शेष अनुच्छेद  26 जनवरी 1950 को जोड़े गये 
  • अनु- 394 (क ) हिन्दी भाषा में प्राधिक्रत पाठ 
  • अनु- 395 इसके द्वारा ‘भारत स्वतंत्रता अधिनियम -1947 तथा भारत शासन अधिनियम – 1935 को निरसित (Repealed) कर दिया गया |
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