विधान परिषद (Legislative Council) in india क्या है ? 2022

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विधान परिषद (Legislative Council)

  • राज्य विधान मंडल का दूसरा और उच्च सदन विधान परिषद (Legislative Council) है यह विधानसभा से कम महत्वपूर्ण सदन है राज्यसभा के समान ही यह भी एक स्थायी सदन है अतः राज्यपाल इसका  विघटन नहीं कर सकता है अनुच्छेद 169 के तहत संसद को किसी राज्य में विधान परिषद को स्थापित करने या समाप्त करने का अधिकार दिया गया है
  • इसके लिए उस राज्य की विधान सभा द्वारा इस आशय का संकल्प अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई(2/3) सदस्यों से पारित किया जाना चाहिए इस प्रकार विधान परिषद (Legislative Council) का ऐसा सदन है जिसे समाप्त तो किया जा सकता है किंतु विघटित नहीं किया जा सकता है
  • मूल संविधान में अनुच्छेद 168 के तहत यह प्रावधान किया गया था कि कुछ अधिक जनसंख्या वाले राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक ,उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल में विधानमंडल द्विसदनीय होगा तथा शेष राज्यों में एक सदनीय  होगा मध्य प्रदेश को छोड़कर उपयुक्त सभी राज्यों में समय-समय पर विधान परिषद का गठन किया गया किंतु बाद में कुछ राज्यों में विधान परिषद को एक अनुपयोगी सदन मानते हुए उसको समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया अतः संसद ने विधि द्वारा 1969 में पंजाब तथा पश्चिम बंगाल की, 1985 में आंध्र प्रदेश की तथा 1986 में तमिलनाडु की विधान परिषद (Legislative Council) को समाप्त कर दिया गया
  • मध्य प्रदेश सरकार ने संकेत दिया है कि वह विधान परिषद (Legislative Council) के निर्माण की दिशा में कदम उठाने की योजना बना रही  है 7 वे संविधान संशोधन अधिनियम 1956 के द्वारा मध्यप्रदेश के लिए विधान परिषद की स्थापना का प्रावधान किया गया था किंतु अभी तक राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना जारी न किए जाने के कारण मध्य प्रदेश में विधान परिषद का गठन नहीं किया जा सका भारत के सभी राज्यों में दो सदन अस्तित्व में नहीं है

ध्यान देने योग्य है कि:वर्तमान में सिर्फ 6 राज्यों में ही विधान परिषद की व्यवस्था की गई है जो इस प्रकार हैं (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र,आंध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा तेलंगाना)

  • 2007 में आंध्र प्रदेश में विधान परिषद (Legislative Council) को पुनः स्थापित किया गया है 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश से अलग कर भारत के 29वे  राज्य के रूप में गठित तेलंगाना राज्य भी द्विसदनीय विधायिका का प्रावधान किया गया है
  • जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 द्वारा जम्मू कश्मीर विधान परिषद (Legislative Council) को समाप्त कर दिया गया द्विसदनीय विधान मंडल वाले राज्यों को बाईकैमरल स्टेट कहा जाता है
  • 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग के समय कुल 5 पुनर्गठित राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र ,कर्नाटक, तथा जम्मू-कश्मीर में द्विसदनीय विधायिकाये थे

इसे दूसरा सदन क्यों कहते हैं ?

राज्यों में दो सदनों के विचार पर संविधान सभा में मतभेद था 

  • जिस प्रकार संसद में दो सदन होते हैं वैसे ही राज्य की इच्छा अनुसार राज्य में भी दो सदन हो सकते हैं
  • इसके पक्ष में तर्क दिया जाता है कि विधान परिषद के रूप में एक अन्य सदन विधानसभा की कार्यवाहीओ पर नियंत्रण रख सकता है
  • इसके विरोध में तर्क दिया जाता है कि विधान परिषद का उपयोग विधि निर्माण को निलंबित करने और ऐसे नेताओं को सदन में भेजने के लिए किया जा सकता है जो चुनाव जीतने में सक्षम नहीं हैं

विधान परिषद (Legislative Council) के सदस्य की संख्या 

  • संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार, विधानपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई(1/3 ) से अधिक नहीं होनी चाहिए , लेकिन यह सदस्य संख्या 40 से कम नहीं चाहिये।
  • मध्य प्रदेश में  विधानसभा सदस्यों की संख्या 230 है, प्रस्तावित विधानपरिषद में अधिकतम 76 सदस्य हो सकते हैं।
  • राज्यसभा सांसद की ही तरह विधानपरिषद सदस्य (जिन्हें हम  MLC भी कहते है ) का कार्यकाल भी 6 वर्ष का होता है, जहाँ प्रत्येक दो वर्ष के बाद  इसके एक-तिहाई सदस्य कार्यनिवृत्त हो जाते हैं।
विधान परिषद (Legislative Council) के सदस्य की संख्या 
क्र. स राज्य का नाम  सदस्य संख्या 
उत्तर प्रदेश  100 
2 महाराष्ट्र  78 
3 बिहार  75 
4 कर्नाटक  75 
5 आंध्रप्रदेश  58 
6 तेलंगाना  43 
  • संसद व्दारा राजस्थान और असम को भी दोसदनीय विधानमंडल की मंजूरी मिल गई है 
  • आंध्रप्रदेश की विधान परिषद् (Legislative Council) को 1985 में संसद व्दारा समाप्त कर दिया गया था किन्तु मार्च 2007 में उसे पुनः स्थापित कर दिया गया है 
  • जम्मू कश्मीर विधानपरिषद को जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019के अंतर्गत समाप्त कर दिया गया तथा जम्मू कश्मीर को नया संघ शासित  प्रदेश बना दिया गया

विधान परिषद (Legislative Council) का गठन (अनुच्छेद 171)

  • संविधान का अनुच्छेद 171 किसी राज्य के विधानसभा के अलावा एक विधान परिषद (Legislative Council) के गठन का प्रावधान किया गया है राज्यसभा की तरह विधान परिषद के सदस्य सीधे मतदाताओं द्वारा निर्वाचित नहीं होते हैं
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 168 राज्य में विधान मंडल का प्रावधान करता है अनुच्छेद 169 के अनुसार किसी राज्य में विधान परिषद का गठन किया जा सकता है यदि राज्य की विधानसभा में इस आशय का संकल्प विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों की संख्या के कम से कम दो तिहाई(2/3) बहुमत द्वारा पारित कर दिया है संसद के दोनों सदन फिर इस आशय का अधिनियम पारित करते हैं और इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति भी जरुरी होती है
  • इस प्रकार के संशोधन से संविधान में परिवर्तन आता है किंतु  इसे अनुछेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन नहीं माना जाता है
  • किसी राज्य में विधान परिषद की सदस्यों की कुल  संख्या उस राज्य की विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या के एक तिहाई(1/3) से अधिक नहीं होगी किंतु किसी विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या किसी भी दशा में 40 से कम नहीं होनी चाहिए उत्तर प्रदेश कि विधान परिषद में सर्वाधिक 100 सदस्य हैं दूसरी महाराष्ट्र में 78 सदस्य हैं

विधानसभा के सदस्यों का निर्वाचन

  • संविधान के अनुच्छेद 171 (3) के अनुसार विधान परिषद के सदस्य का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से अनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमण मत द्वार होता है कुल चार प्रकार के निर्वाचक मंडल एक निश्चित अनुपात में विधान परिषद की सदस्यों का चुनाव करते हैं तथा शेष सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं जिसका विवरण निम्न प्रकार है
  • विधानसभा का निर्वाचन मंडल:- विधान परिषद की एक तिहाई(1/3) सदस्यों का निर्वाचन विधानसभा सदस्यों के निर्वाचन मंडल द्वारा किया जाता है
  • स्थानीय संस्थानों का निर्वाचन मंडल:- विधान परिषद के लगभग एक तिहाई(1/3) सदस्य नगरपलिका जिला पंचायत तथा अन्य स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के सदस्यों से
  •  शिक्षकों का निर्वाचक मंडल:- विधान परिषद के सदस्यों का लगभग बारहवा भाग (1/12) उन शिक्षकों द्वारा चुने जाते हैं जो राज्य के भीतर माध्यमिक विद्यालय या इससे उच्च शिक्षण संस्थाओं  में से कम से कम 3 वर्ष के शिक्षण कार्य कर रहे हो
  •  स्नातकों का निर्वाचक मंडल:- विधान परिषद के सदस्यों का लगभग बारहवा भाग (1/12) ऐसे व्यक्तियों द्वारा चुना जाएगा जो कम से कम 3 वर्ष पूर्व किसी विश्वविद्यालय से स्नातक कर चुके हो या संसद द्वारा निर्मित किसी विधि द्वारा स्नातक के तुल्य मान लिए गए हो
  •  राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्य विधान परिषद विशेष सदस्य अर्थात कुल सदस्य संख्या के (1/6) भाग सदस्य राज्यपाल द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से मनोनीत किए जाते हैं जिन्हें विज्ञान साहित्य कला सहकारी आंदोलन अथवा सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या अनुभव हो
  • संसद द्वारा 28 अगस्त 2003 को जनप्रतिनिधित्व संशोधन अधिनियम 2003 पारित किया गया है जिसमें राज्य की विधानसभाओं के चुनाव के लिए खुली मतदान प्रणाली लागू करने का प्रावधान किया गया है राज्यसभा और विधान परिषद दो ऐसी संस्थाएं हैं जिनके चुनाव गुप्त मतदान के आधार पर नहीं होगा बल्कि यह चुनाव खुले मतदान के आधार पर होता है इस प्रणाली के तहत मतदाता अपना मतपत्र पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखा सकता है
विधान परिषद के सदस्यों की योग्यता
  • संविधान के अनुच्छेद 173 के अनुसार किसी व्यक्ति को विधान परिषद (Legislative Council) का सदस्य निर्वाचित होने के लिए यह आवश्यक है कि
  • वह पहला भारत का नागरिक हो
  • 30 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो
  •  किसी ऐसे अन्य योग्यता रखता हो जो कि  संसद द्वारा निर्मित किसी विधि द्वारा विहित  की गई हो इसके अतिरिक्त लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अनुसार विधान परिषद के निर्वाचन सदस्य को उस राज्य के किसी विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्र का निर्वाचन होना चाहिए तथा मनोनीत किए जाने वाले सदस्य को उस राज्य का निवासी होना चाहिए जिसकी विधान परिषद का वह सदस्य बनना चाहता है
विधान परिषद के सदस्यों का कार्यकाल
  • विधान परिषद एक स्थायी सदन है यह कभी भंग नहीं होती बल्कि इसके एक तिहाई सदस्य हर दूसरे वर्ष  की समाप्ति पर अवकाश ग्रहण कर लेते हैं और उनके स्थान पर उतने  ही नए सदस्य निर्वाचित कर लिए जाते हैं इस प्रकार प्रत्येक सदस्य 6 वर्ष तक विधान परिषद का सदस्य रह सकता है
  • विधान परिषद को भंग नहीं किया जा सकता है किंतु विधान सभा द्वारा इस आशय का संकल्प पारित करने पर संसद द्वारा समाप्त किया जा सकता है
पदाधिकारी
  • संविधान के अनुच्छेद 182 के अनुसार विधान परिषद (Legislative Council) के दो प्रमुख पदाधिकारी होते हैं सभापति और उपसभापति इन दोनों का चुनाव विधान परिषद अपने सदस्यों में से करती है इनके अधिकार व कार्य वही हैं जो विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के हैं यह पदाधिकारी कब तक अपनी पद पर बने रहते हैं जब तक के वे विधान परिषद के सदस्य रहते हैं
  • सभापति अपना त्यागपत्र उपसभापति को और उपसभापति अपना त्यागपत्र सभापति को देता  है अर्थात यह दोनों अपना त्यागपत्र एक दूसरे को आपस में देते हैं सभापति या उपसभापति को  विधान परिषद  के समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया भी जा सकता है परंतु ऐसा संकल्प तब तक प्रस्तावित नहीं किया जा सकता जब तक के उस संकल्प को प्रस्तावित करने के अभिप्राय की कम से कम 14 दिन पहले सूचना सभापति और उपसभापति को (जिसे हटाना हो) ना दे दी गई हो  
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