Local Self -Government ||स्थानीय स्वशासन || समितियां बलवंत ,अशोक मेहिता…

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स्थानीय स्वशासन क्या है ?

 स्थानीय सुशासन से तात्पर्य शासन की उस प्रणाली से है जिसमें निचले स्तर पर लोगों को भागीदारी बनाकर लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को सुनिश्चित किया जाता है तथा लोगों को अपनी समस्याएं स्वयं हल करने के लिए आत्म निर्भर  बनाया

भारत में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं का अस्तित्व प्राचीन भारत में मौर्य काल से ही रहा है मध्यकाल में मुगलों के अधीन भी यह संस्थाएं अस्तित्व में रहे हैं आधुनिक काल में ब्रिटिश शासन द्वारा भी स्थानीय स्वशासन के लिए कुछ प्रयास किए गए थे  1864 में भारत सरकार की एक प्रस्ताव द्वारा स्थानीय स्वशासन को मान्यता प्रदान किया गया था तथा 1870 में लॉर्ड मेयो ने पंचायतों को कार्यात्मक व वित्तीय स्वामित्व प्रदान किया था 1882 ईस्वी में वायसराय लॉर्ड रिपन ने स्थानीय स्वशासन के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जिसके द्वारा पूरे देश में उपखंड या ताल्लूका बोर्ड तथा जिला बोर्ड स्थापित करने का सुझाव दिया इस प्रस्ताव को स्थानीय स्वशासन का मैग्नाकार्टा कहा जाता है

स्थानीय संस्थाओं की स्थिति की जांच करने के लिए 1960 में (होबहाउस) की अध्यक्षता में राजकीय विकेंद्रीकरण आयोग (शाही आयोग) का गठन किया गया था आयोग ने 1909 में प्रस्तुत रिपोर्ट में स्वायत्त संस्थाओं के विकास पर बल दिया 1915 में लॉर्ड हार्डिंग ने भी अपनी शासकीय रिपोर्ट मैं स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने का मत व्यक्त किया

1919 के भारत शासन अधिनियम मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार द्वारा स्थानीय स्वशासन के बारे में स्पष्ट प्रावधान किया गया इस अधिनियम द्वारा द्वैध शासन प्रणाली (जो मूलतः कार्टियस  की देन थी) स्थापित कर स्थानीय स्वशासन को हस्तांतरित विषय इन विषयों का प्रशासन गवर्नर अपने भारतीय मंत्रियों की सलाह से करता था जो प्रांतीय विधान परिषद के प्रति उत्तरदाई होते थे) के तहत रखा गया 1920 में संयुक्त प्रांत अशोक बंगाल बिहार मद्रास और पंजाब में पंचायतों की स्थापना के लिए कानून बनाया गया 1935 के अधिनियम द्वारा स्थानीय स्वशासन को पूर्णतया राज्य का विषय बना दिया गया

गांधीवादी नेता श्री मन्ना नरायण अग्रवाल ने संविधान सभा में पंचायती राजव्यवस्था का समर्थन किया एवं संविधान के नीति निर्देशक तत्व भाग 4 के भाग में पंचायती राज व्यवस्था को शामिल किया अनुच्छेद 40 के सी कुमारप्पा ने स्वतंत्रता के बाद गांधीवादी अर्थ-व्यवस्था का समर्थन किया स्वतंत्रता प्राप्त के बाद गांधी जी के ग्राम स्वराज की अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से पंचायती राज व्यवस्था पर विशेष बल दिया गया और इसके लिए केंद्र में पंचायती राज एवं सामुदायिक विकास मंत्रालय की स्थापना की गई तथा एस के डे को इसका मंत्री बनाया गया

2 अक्टूबर 1952 को प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहल पर सामुदायिक विकास कार्यक्रम( Community Development Programme) को प्रारंभ किया गया

सामुदायिक विकास का पहला स्थापित कार्यक्रम राष्ट्रीय प्रसार सेवा था जो 1953 में फोर्ड फाउंडेशन के सहयोग से शुरू किया गया था इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के आर्थिक विकास एवं सामाजिक पुनरुद्धार कार्यक्रमों के प्रति जनता में रुचि पैदा करना था तथा उसकी भागीदारी को बढ़ाना था लेकिन इसमें जनता को अधिकार नहीं दिया गया जिस कारण यह सरकारी अधिकारियों तक सीमित रह गया और असफल हो गया इसके बाद पंचायती राज व्यवस्था के संबंध में सुझाव देने के लिए समय-समय पर कई समितियों का गठन किया गया जो निम्न प्रकार हैं

बलवंत राय मेहता समिति 1956

सामुदायिक विकास कार्यक्रम के असफल होने के बाद पंचायत राज व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए 1956 में बलवंत राय मेहता समिति का गठन किया गया इस समिति ने अपनी रिपोर्ट 1957 में प्रस्तुत कर दी थी 1957 के अंत में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में इस समिति ने स्थानीय स्वशासन हेतु गांव को लेकर जिला स्तर तक त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था का सुझाव दिया समिति ने इसे लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की व्यवस्था कहा त्रिस्तरीय व्यवस्था को सबसे निचले स्तर अर्थात ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत और प्रखंड स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद के गठन का सुझाव देने के साथ यह सिफारिश भी की थी कि लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की शुरुआत पंचायती समिति के स्तर पर होनी चाहिए 12 जनवरी 1958 को राष्ट्रीय विकास परिषद ने बलवंत राय मेहता समिति की प्रजातांत्रिक विकेंद्रीकरण की सिफारिश को स्वीकार करते हुए राज्यों से इसे कार्य करने के लिए कहा इसीलिए बलवंत राय मेहता को भारत के पंचायती राज व्यवस्था का वास्तुकार या शिल्पी कार कहा जाता है

सर्वप्रथम आंध्र प्रदेश में प्रायोगिक तौर पर अगस्त 1958 में कुछ भागों में पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया गया 2 अक्टूबर 1959 ईस्वी को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राजस्थान के नागौर जिले बगदरी गांव में पंचायती राज व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत की और इसी दिन ऐसे संपूर्ण राजस्थान में लागू कर दिया गया अतः राजस्थान देश का ऐसा पहला राज्य है जहां संपूर्ण राज्य में सर्वप्रथम पंचायती राज की स्थापना की गई बाद में 1959 में आंध्र प्रदेश राज्य की स्थापना की गई तमिलनाडु एवं कर्नाटक 1962 में महाराष्ट्र 1963 में गुजरात तथा 1964 में पश्चिम बंगाल में पंचायती राज व्यवस्था को प्रारंभ किया गया धीरे-धीरे अन्य राज्यों में भी इस व्यवस्था को अपनाया गया

अशोक मेहता समिति 1977

पंचायती राज व्यवस्था के मूल्यांकन तथा इसे और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए सितंबर 1977 ईस्वी मैं अशोक मेहता समिति का गठन किया गया इस समिति में कुल 13 सदस्य थे अगस्त 1978 में प्रस्तुत रिपोर्ट में इस समिति ने पंचायती राज व्यवस्था के त्रिस्तरीय ढांचे के स्थान पर दो स्तरीय ढांचे की संज्ञा दी जिसमें जिला स्तर पर जिला परिषद व मंडल स्तर पर मंडल पंचायत शामिल थे मंडल पंचायतों में कम से कम 15 से 20 हजार की जनसंख्या और 10 से 15 गांव सम्मिलित किए जाने थे एस समिति के अनुसार जिला परिषद को शक्तिशाली बनाकर ऐसे ही समस्त विकास कार्यों का केंद्र बिंदु बनाया जाना चाहिए तथा विकास योजनाओं की तैयारी जिला परिषद द्वारा व क्रियान्वयन मंडल पंचायत द्वारा किया जाना चाहिए

समिति का मन था के पंचायतों के निर्वाचन में राजनीतक दलों को खुले तौर पर अपने चुनाव चिन्ह के आधार पर भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए और ग्राम पंचायत व पंचायत समिति को समाप्त कर देना चाहिए तथा मंडल अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष तथा जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष होना चाहिए समिति का सुझाव था कि पंचायतों के गठन के बाद चुनाव 6 महीने की अवधि में होना चाहिए

राज्य मंत्री परिषद में एक पंचायती राज मंत्री की नियुक्ति होनी चाहिए पंचायती राज के अंतर्गत वित्तीय निगम की भी स्थापना होनी चाहिए अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित होनी चाहिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सलाह से राज्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पंचायतों का चुनाव संपन्न करवाना चाहिए इस समिति की सिफारिश को अपर्याप्त मानते हुए अस्वीकार कर दिया गया

डॉक्टर पी. बी. के. राव समिति 1985

ग्रामीण विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए उपयुक्त प्रशासनिक व्यवस्था हेतु सिफारिश करने के लिए 1985 में डॉक्टर  पी बी के राव समिति का गठन किया गया इस समिति का गठन योजना आयोग की सिफारिश पर किया गया था 1986 ईस्वी में प्रस्तुत रिपोर्ट में इस समिति ने राज्य स्तर पर राज्य विकास परिषद जिला स्तर पर जिला परिषद मंडल स्तर पर मंडल पंचायत था गांव स्तर पर गांव सभा के गठन की सिफारिश करते हुए जिला परिषद को सर्वाधिक महत्व दिया इस समिति ने वित्त आयोग के गठन पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष पंचायतों के नियमित चुनाव कराने तथा अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति तथा महिलाओं के लिए आरक्षण की सिफारिश की परंतु इसकी सिफारिशों को भी अमान्य कर दिया और इस समिति को अस्वीकार कर दिया गया

डॉक्टर एल.एम सिंघवी समिति 1986

ग्रामीण विकास विभाग भारत सरकार द्वारा 16 जून 1986 को डॉ लक्ष्मी मल सिंघवी की अध्यक्षता में पंचायती राज प्रणाली के पुनरुत्थान हेतु सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन किया गया समिति ने स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक मान्यता प्रदान करने पंचायती संस्थानों के चुनाव गैर दलीय आधार पर एवं नियमित रूप से कराने न्याय पंचायत एवं ग्राम न्यायालयों की व्यवस्था करने तथा पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की सिफारिश की थी

पी.के थुंगन समिति 1988

1988 में पीके थंगोम समिति का गठन पंचायती संस्थाओं पर विचार करने के लिए किया गया रंगून समिति ने भी पंचायती राज संस्थाओं को शक्तिशाली बनाने के लिए उन्हें संवैधानिक दर्जा देने का सुझाव दिया समिति ने कहा कि पंचायतों का संबंध सीधा संघ से होना चाहिए राज्यों से नहीं प्रत्येक राज्य में एक वित्तीय आयोग तथा नियोजन तथा समन्वय समिति होनी चाहिए

1989 में प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी ने पंचायतों के सुधार व सशक्तिकरण में विशेष रूचि ली तथा सिंघवी और थुंगन समिति की सिफारिशों के आधार पर 64 वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया जैसे लोकसभा द्वारा पारित कर लिया गया लेकिन राज्यसभा द्वारा ना मंजूरी कर दिए जाने के कारण विधेयक समाप्त हो गया बाद में पंचायतों संबंधी प्रावधान के लिए प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव द्वारा 73वें संविधान संशोधन विधेयक संसद में लाया गया

स्थानीय स्वशासन के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य 
  • भारत में स्थानीय स्वशासन का प्रारम्भ किस वायसराय ने किया था लार्ड रिपन ने 
  • 73वें संविधान संशोधन द्वारा भाग 9 के तहत कुल कितने नए अनुच्छेद जोड़कर पंचायत संबंधी प्रावधान किया गया — 16 अनुच्छेद
  • ग्राम पंचायत के सूची का विषय है राज्य सूची का
  • संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यों को ग्राम पंचायत गठन करने का निर्देश दिया गया है अनुच्छेद 40 के तहत
  • संविधान के किस भाग के तहत पंचायतों के बारे में प्रावधान किया गया है— भाग 9 (अनुच्छेद 243 से 243o तक)
  • शाही आयोग का गठन किसकी अध्यक्षता में किया गया था सी. ई. एच होवहाउस की अध्यक्षता में
  • किस अधिनियम द्वारा स्थानीय स्वशासन को केंद्रीय विषय से हटाकर राज्य का विषय बनाया गया भारत सरकार अधिनियम 1935 के द्वारा
  • अंग्रेजों ने भारत में शासन के विकेंद्रीकरण के लिए शाही आयोग का गठन कब किया 1907 
  • स्थानीय स्वशासन का जनक किसे कहा जाता है लॉर्ड रिपन
  • सामुदायिक विकास कार्यक्रम कब प्रारंभ किया गया था 2 अक्टूबर 1952 को
  • बलवंत राय मेहता समिति का गठन कब किया गया — 1956 में
  • किस समिति ने सर्वप्रथम भारत में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था की सिफारिश किया थी — बलवंत राय मेहता समिति
  • लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की योजना किस समिति ने प्रस्तुत किया था — बलवंत राय मेहता समिति ने
  • वर्तमान में पंचायत राज्य की त्रिस्तरीय प्रणाली में तीन स्तर कौन-कौन से हैं — (1) ग्राम स्तर पर- ग्राम पंचायत(2 ) मध्यवर्ती स्तर पर- क्षेत्र पंचायत (3) जिला स्तर पर- जिला पंचायत
  • पंचायती राज व्यवस्था में शासन प्रणाली की संरचना क्या है — ग्राम खंड और जिला स्तर पर स्थानीय स्वशासन की त्रिस्तरीय संरचना
  • संविधान के 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायतों को निर्दिष्ट किए जाने वाले कार्यों को किस अनुसूची में दिया गया है — अनुसूची 11 में
  • किशोर राज्य सूची की जनसंख्या कितनी होने पर उस राज्य में मध्यवर्ती खंड स्तर पर पंचायत का गठन आवश्यक नहीं है — 20 लाख से कम होने पर
  • किस क्षेत्र पंचायत का क्षेत्र कौन निर्धारित करता है राज्य सरकार( अनुच्छेद 243 ग तहत)
  • ग्राम पंचायत अध्यक्ष अथवा सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए — 21 वर्ष
  • ग्राम पंचायत के अध्यक्ष ग्राम प्रधान और सदस्यों का चुनाव कौन करता है — ग्राम सभा के सदस्य( प्रत्यक्ष रूप से)
  • तृणमूल लोकतंत्र अर्थात जमीनी स्तर पर लोकतंत्र का संबंध किससे है  — पंचायती राज व्यवस्था से
  • हम आशा करते है कि आप इस लेख (post) से बहुत कुछ सीखे होगे अगर post अच्छी लगी हो तो अपना feedback जरुर भेजे धन्यबाद   
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