Municipal Government: Municipalities|| नगरीय प्रशासन: नगरपालिकाए

नगरपालिका का विकास कैसे हुआ

भारत में नगरीय शासन व्यवस्था भी प्राचीन काल से ही प्रचलन में रही है इसे कानूनी रूप सर्वप्रथम 1687 ईस्वी में दिया गया जब ब्रिटिश सरकार द्वारा मद्रास शहर के लिए नगर निगम नामक स्थानीय संस्था की स्थापना की गई बाद में 1793 के चार्टर अधिनियम के अधीन मद्रास कोलकाता तथा मुंबई के तीनों महानगरों में नगर निगमों की स्थापना की गई तथा स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को वैधानिक अधिकार प्रदान किया गया

भारत सरकार अधिनियम 1919 में नगरीय प्रशासन के संबंध में स्पष्ट प्रावधान किया गया कि 1919 के अधिनियम से ही जवाहरलाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, पुरुषोत्तम दास टंडन आदि ने नगर पालिकाओं में प्रवेश किया था पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1924 एवं 1925 में इलाहाबाद नगर पालिका के अध्यक्ष चुने गए थे

स्वतंत्रता के बाद 74 वें संविधान संशोधन द्वारा नगरीय शासन के संबंध में संवैधानिक प्रावधान किया गया है प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1989 में नगरीय शासन संबंधी प्रावधान के लिए 65 वें संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन राज्यसभा द्वारा पारित न होने के कारण इसे कानूनी रूप प्राप्त ना हो सका इस विधेयक में सुधार कर प्रधानमंत्री पी.वी नरसिंह राव द्वारा इसे 74 वें संविधान संशोधन विधेयक 1992 के रूप में पुनः लोकसभा में पेश किया गया क्रमशः 22 दिसंबर एवं 23 दिसंबर 1992 को इसे लोकसभा एवं राज्यसभा द्वारा पारित कर दिए जाने पर 20 अप्रैल 1993 को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृति प्रदान किया गया तथा 1 जून 1993 से लागू कर दिया गया इस अधिनियम द्वारा संविधान में एक नया भाग 9(क) तथा अनुसूची (12वीं अनुसूची) जोड़कर नगर प्रशासन के विषय में विस्तृत प्रावधान किया गया है

नगर पालिका का गठन(Constitution of Muncipalities)

प्रत्येक राज्य में नगर पंचायत ,नगरपालिका परिषद, तथा नगर निगम का गठन किया जाएगा नगर पंचायत का गठन उसी क्षेत्र के लिए होगा जो ग्रामीण क्षेत्र से नगरीय क्षेत्र में बदल रहे हैं नगरपालिका परिषद का गठन छोटे नगरीय क्षेत्रों के लिए किया जाएगा जबकि  बड़े नगरों के लिए नगर निगम का गठन किया जाएगा किंतु ऐसे नगरी क्षेत्र मैं जिसे राज्यपाल द्वारा औद्योगिक नगरी घोषित किया गया है नगर पालिका का गठन नहीं किया जाएगा यह अनुच्छेद (243Q) बताता है

नगर पालिकाओं की संरचना (Composition of Municipalities)

किसी नगर पालिका में  सभी स्थान नगर पालिका के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने व्यक्तियों द्वारा भरे जाएंगे ऐसे प्रयोजन के लिए प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र को प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा जिसे वार्ड कहा जाएगा किंतु राज्य का विधान मंडल विधि द्वारा नगरपालिका में निम्नलिखित व्यक्तियों के प्रतिनिधित्व का उपबंध कर सकती है

  1. ऐसे व्यक्तियों को जिन्हें नगर पालिका प्रशासन का विशेष ज्ञान या अनुभव हो किंतु है नगरपालिका के अधिवेशन में मत देने का अधिकार नहीं है
  2. लोकसभा और राज्यसभा की विधानसभा के ऐसे सदस्यों का जो पूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें वह नगर पालिका क्षेत्र पूर्णत या भागत आता है
  3.  राज्य सभा और राज्य विधान परिषद के ऐसे सदस्यों का जो ऐसे नगर पालिका क्षेत्र के भीतर मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं
  4.  वार्ड समितियों के अध्यक्षों का

ध्यान दे :- ऐसी नगरपालिका जिसकी जनसंख्या 300000 या उससे अधिक है के प्रादेशिक क्षेत्र के भीतर एक या अधिक वार्ड को मिलाकर वार्ड समितियों का गठन किया जाता है अनुच्छेद 243 S वार्ड समिति के गठन क्षेत्र और कार्य आदि का निर्धारण राज्य विधान मंडल करती है

नगर पालिकाओं में स्थानों का आरक्षण (Reservation of Seats in Municipalities)

नगरपालिका में भी अनुसूचित जातियों अनुसूचित जनजातियों तथा स्त्रियों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान अनुच्छेद( 243T) में किया गया है नगर पालिकाओं में आरक्षण संबंधी प्रावधान पंचायतों के समान है अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रत्येक नगर पालिका में स्थान आरक्षित होगा इन आरक्षित स्थानों का एक तिहाई(1/3) स्थान इन वर्गों की स्त्रियों के लिए आरक्षित होगा तथा प्रत्येक नगरपालिका में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले कुल स्थानों का एक तिहाई (1/3) स्थान स्त्रियों (सभी वर्गों की के लिए) आरक्षित होगा जिसमें अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थान शामिल होंगे आरक्षित स्थान नगर पालिकाओं के भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों (वार्ड)  में चक्रानुक्रम से आवंटित किया जा सकेगा नगर पालिका में अध्यक्ष पद के आरक्षण संबंधी प्रावधान करने का अधिकार राज्य विधान मंडल को दिया गया है पिछड़े वर्गों के लिए नगरपालिका में आरक्षण का प्रावधान नहीं है किंतु राज्य विधानमंडल नगरपालिका सदस्य या अध्यक्षों के पद हेतु पिछड़े वर्गों के लिए भी आरक्षण प्रावधान कर सकता है उत्तर प्रदेश विधान मंडल द्वारा 2000 में अपने नगरपालिका अधिनियम में संशोधन कर अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है

नगर पालिकाओं की अवधि या कार्यकाल (Duration of Municipalities)

नगरपालिकाओं की अवधि भी पंचायतों के समान प्रथम अधिवेशन से 5 वर्ष तक होती है उसे 5 वर्ष के पूर्व भंग किया जा सकता है किंतु भंग करने के पूर्व उसे सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाना चाहिए नई नगरपालिका के गठन के लिए निर्वाचन उसके कार्यकाल (5 वर्ष) की समाप्ति के पूर्व कराया जाना चाहिए यदि कोई नगर पालिका समय से पूर्व विघटित  कर दी जाती है तो विघटन की तिथि से 6 माह के भीतर उसके लिए निर्वाचन कराया जाना चाहिए इस प्रकार गठित नगर पालिका अपनी शेष अवधि तक कार्य करती है यदि विघटित नगरपालिका का शेष कार्यकाल 6 माह से कम हो तो उसके लिए निर्वाचन (6 माह) के भीतर आवश्यक नहीं है

सदस्यता के लिए अयोग्यताएं (Disqualification for Membership)

कोई व्यक्ति किसी नगरपालिका का सदस्य चुने जाने के लिए या सदस्य बने रहने के लिए अयोग्य होगा

  1. यदि वह संवाद राज्य विधान मंडल के निर्वाचन के प्रयोजन के लिए बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन अयोग्य है
  2.  यदि वह राज्य विधान मंडल द्वारा बनाई गई विधि के द्वारा या उसके अधीन अयोग्य है परंतु कोई व्यक्ति इस आधार पर अयोग्य नहीं होगा कि वह 25 वर्ष से कम आयु का है यदि उसने 21 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है
  3.  नगरपालिका के किसी सदस्य की अयोग्यता संबंधी प्रश्न का विनिश्चय विधानसभा द्वारा बेहद प्राधिकारी द्वारा किया जाता है
नगर पालिकाओं की शक्तियां एवं प्राधिकार(Power of Authority of municipalities)

राज्य विधानमंडल विधि बनाकर नगर पालिकाओं को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जो वह उन्हें स्वायत्त शासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक समझे ऐसी विधि में नगर पालिका को शर्तों के अधीन रहते हुए अधोलिखित के संबंध में शक्तियां एवं उत्तरदायित्व का पालन करने के लिए उपबंध किए जा सकेंगे

  1. आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करना
  2.  ऐसे कार्यों को करना और ऐसी योजनाओं की क्रियान्वयन करना जो उन्हें सौंपी जाएं जिनके अंतर्गत वे योजनाएं भी हैं जो बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध हैं
  3. नगर पालिकाओं को 12वीं अनुसूची में वर्णित कुल 18 विषयों पर विधि बनाने की शक्ति प्रदान की गई है
नगर पालिकाओं के निर्वाचन(Election of the Municipalities)

नगर पालिकाओं के लिए निर्वाचक नामावली तैयार करने और उसके सभी निर्वाचन ओं के संचालन का अधीक्षण निर्देशन और नियंत्रण अनुच्छेद 243 के के तहत पंचायतों के लिए गठित राज्य बना कर नगर पालिकाओं के निर्वाचन से संबंधित सभी विषयों से संबंध ओप्पो बंद कर सकेगा निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों को हस्तक्षेप निरुद्ध किया गया है

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