विराम चिन्ह किसे कहते हैं |

विराम चिन्ह कितने प्रकार के होते हैं

विराम चिन्ह परिभाषा:- विराम शब्द का शाब्दिक अर्थ है ठहराव या रुकना अर्थात पढ़ने या लिखने के दौरान ठहरने के लिए जिन चिन्हों का प्रयोग किया जाता है उन्हें विराम चिन्ह कहते है विराम चिन्हों को 15 प्रकार से  वताया गया है  जो निम्नलिखित है |

(1). अल्पविराम  — ( , )
(2). अर्द्धविराम   — ( ; )
(3). पूर्णविराम  — ( । )
(4). उपविराम  — ( : )
(5). प्रश्नवाचक-चिह्न  — ( ? )
(6). विस्मयादिबोधक-चिह्न — ( ! )
(7). संयोजक-चिह्न — ( – )
(8). उद्धरण- चिह्न — ( ” ” ) या ( ‘  ‘ ) 
(9). कोष्ठक-चिह्न  — ( ( ) ) या ( [ ] )
(10). निर्देश-चिह्न — ( _ )
(11). लोप-चिह्न  —  ( … ) या ( xxx )
(12). लाघव-चिह्न  — ( ॰ )
(13). पुनरुक्ति-चिह्न  — ( ” ” ” )
(14). त्रुटि-चिह्न  — ( ^ )
(15). विवरण-चिह्न — ( :- )

1 अल्पविराम ( , )

अल्पविराम का अर्थ होता है थोड़ा ठहराव , थोड़ी देर के लिए रुकना। इसका प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है —
 
1 यदि वाक्य के बीच में :- पर , परन्तु , किन्तु , लेकिन , तो , भी , मगर , इसलिए ,तथापि अतः, क्योंकि , बल्कि ,  आदि से  पहले चिन्ह का प्रयोग करते है ।
उदाहरण:-
  • बोलो , मगर धीरे से । 
  • वह आया , लेकिन चला गया । 
  • सिर्फ पढ़ो ही नहीं , वरन् काम भी करो । 
2 यदि एक ही प्रकार के शब्द या वाक्यांश आएँ। :
उदाहरण:-
  • शब्दों में – राम , श्याम , मोहन और सोहन दोस्त हैं।
  • वाक्यांशों में – वह यहाँ आता है , पढ़ता है और चला जाता है।
3 यदि वाक्य में :- यह , उसे , तब , अब , या , तो आदि लुप्त हों। 
उदाहरण:-
  • मैं जो कहता हूँ , ध्यान से सुनो । (‘उसे’ — लुप्त है)
  • जब जाना ही है , चले जाओ । (‘तो’ – लुप्त है) 
4 यदि वाक्य का आरंभ :-  हाँ , नहीं , बस , अच्छा , सचमुच , वस्तुतः , छिः आदि से हो। 
उदाहरण:-
  • हाँ , मैं जानता हूँ। नहीं , यह तो गलत है। 
  • सचमुच , वह इतना बुद्धिमान् है ?  छिः , यह क्या कर दिया ? 
5 संबोधन के बाद इस चिह्न को लगाते है 
उदाहरण:-
  • अरे मित्र , तुम कहाँ गये थे ? 
  • देशवासियो , मेरे हाथ मजबूत करें । 
  • प्यारी बहनों, देवियों और सज्जनों, हे बालकों  ( गलत है) 
  • प्यारी बहनो, सज्जनो और देवियो, हे बालको   (सही है )
6 यदि शब्द को दो-तीन बार दोहराना हो।
उदाहरण:-
  • नहीं , नहीं , मैं तुम्हारी बात नहीं मान सकता । 
  • चलो , चलो , यहाँ कुछ नहीं मिलेगा । 
  • वह दूर से , बहुत दूर से आया है  ।
7  तिथि में इसका प्रयोग होता है। 
उदाहरण:-
  • मेरा जन्म 16 दिसम्बर , 1999 को हुआ था  
  • वह 23 जुलाई ,2005 को आया था।
8  पत्र में संबोधन के बाद इस चिन्ह का  प्रयोग होता है।
उदाहरण:-
प्रिय सुरेश ,,,,,,, 
,,,,,,,,,,, ,,,,,, खुश रहो ।
 
 किसी की उक्ति के पहले :-‘ कि ‘ के स्थान पर।
उदाहरण:-
सोहन ने कहा कि मैं दिल्ली जाऊँगा । 
सोहन ने कहा , मैं दिल्ली जाऊँगा । 
 
10). नाम और पता में प्रत्येक पद के बाद इसका प्रयोग करें।
उदाहरण:-
  •  प्रो . एस . के . सिंह , प्राध्यापक , हिन्दी विभाग , पटना विश्वविद्यालय , पटना , मेरे मित्र हैं । 
  • वह , कंकड़बाग , पटना , बिहार का रहनेवाला है ।

2 अर्द्धविराम ( ; ) 

  • अल्पविराम से अधिक और पूर्णविराम से कम समय के लिए ठहरते है  वहाँ पर अर्द्धविराम होता है |
  • दो या दो से अधिक उपाधियो को एक साथ लिखने के लिए उनके वीच अर्द्धविराम(;) चिन्ह का प्रयोग किया जाता है

उदाहरण :- 

बी .ए ;एम .ए ; एल. एल. बी.;  

  • अर्द्धविराम ऐसे उपवाक्यो को जोड़ने का कार्य करता है जिन्हें “और” के माध्यम से जोड़ा नही जा सकता |
उदाहरण :-
  1. यह जूता ज्यादा दिन नही चलेगा ;यह कटता है 
  2. कल रविवार की छुट्टी है ;छुट्टी का दिन है ;घुमने चलेगे
  3. नदी के किनारे टहल रहा था ; मंद – मंद हवा बह रही थी;
  • यदि मुख्य वाक्य के परिणाम की व्याख्या अन्य वाक्यों से करनी हो। 
उदाहरण :-
  1.  बड़े ऑफिसर के आते ही ऑफिस का परिदृश्य बदल गया ; बिलकुल शांति छा गयी ; लोगों की जबान बंद हो गयी ; सभी अपने-अपने काम में लग गये ।
 जब वाक्य और उपवाक्य/उपवाक्यों में बहुत अधिक संबद्धता न हो।
उदाहरण :-
  1.  अब क्या करूँ ; वह रूठकर चला गया । 
  2. किसे समझाऊँ , वह माननेवाला नहीं ; सिर्फ अपने मन की करता है ।

3 पूर्णविराम ( । )

  • पूर्णविराम का शाब्दिक अर्थ होता है, पूरा ठहराव। वाक्य की समाप्ति पर इस चिह्न का प्रयोग होता है। पूर्ण विराम को हिंदी में खाड़ी पाई भी कहते है 
  • डॉ वासुदेव नंदन प्रसाद के अनुसार “जहाँ वाक्य की गति अंतिम रूप ले ले ,विचार के तार टूट जाये वहाँ पूर्ण विराम का प्रयोग होता है 
उदाहरण :-
  1. मै हिंदी  पढ़ रहा है ।
  2. राम अयोध्या के राजा थे |                     
  3. राधा मंच पर  नाचेगी । 
  • कभी-कभी किसी घटना का नाटकीय रूप या सजीव वर्णन करने के लिए इस चिह्न का प्रयोग होता है।
उदाहरण :-
  • स्टेडियम में हजारों की भीड़ । अंतिम बॉल । अंतिम बल्लेबाज । चार रनों की जरूरत ।
  • सचिन का प्रवेश । और , यह रहा छक्का । हिन्दुस्तान की विजय । 
 ध्यान दे:-    वाक्य की समाप्ति सिर्फ पूर्णविराम – चिह्न ( । ) से ही नहीं होती , वरन् प्रश्नवाचक या विस्मयादिबोधक – चिह्न से भी होती है। उनमें सिर्फ भाव और भाव के अनुसार चिह्न का अंतर होता है।

4 उपविराम ( : )

किसी व्यक्ति या वस्तु के वारे में वतने लिए किसी कथन को अलग दिखाने के लिए इस चिह्न का प्रयोग करते है  
उदाहरण :-
  1. भगवान राम के अनेक नाम है :रघुपति ,राघव ,रघुराज ,रघुननन्द  
  2. कश्मीर : ए ट्रेजडी ऑफ एरर्स (पुस्तक का नाम)।
  3. विज्ञान : अभिशाप या वरदान (निबंध का शीर्षक)।

5 प्रश्नवाचक-चिह्न ( ? )

इस चिह्न का प्रयोग प्रश्न करने या  पूछने या संदेह आदि का बोध हो  होता है।
उदाहरण :-
  •  प्रश्न के रूप में पूछे गए—– 
  1. क्या आप हिंदी  पढ़ते हैं ?     
  2. आप क्या चौधरी अकादमी से  पढ़ते हैं ?
  •  जिज्ञासा , उत्सुकता या संदेह की स्थिति में —– 
  1. आप मनवीर जी के पुत्र हैं ?       
  2. प्रीती अच्छी लड़की है , है न ?
  •  व्यंग्य के रूप में —–
  1. सिपाही — (चोर से) तू साधु है , है न ?  चोरी हरीश ने नहीं , मैंने की है ?
  • यदि लेखक को शुद्ध – अशुद्ध का संदेह हो।
उदाहरण :-
  1. दिनकर की पहली कविता का नाम रश्मिरथि (?) था।
  2. 1857 ई. के सिपाही-विद्रोह का नायक मंगल पाण्डेय (?) था।

6 विस्मयादिबोधक-चिह्न ( ! )

  •  मनोविकार सूचक शब्दों (हर्ष ,घृणा , विषाद ,  करुणा ,शोक,आश्चर्य , भय)  आदि तीव्र भावों को व्यक्त करने में। 

उदाहरण :-

  1. ओह ! बहुत कठिन समय चल रहा है |
  2. हे  राम ! अब मेरा क्या होगा |
  3. वाह ! अच्छा किया |                 
  4. आह ! वह मर गया |                 
  5. बाप रे ! कितना भयानक शेर |    
  6. छी ! छी ! ऐसा नीच काम |        
  •  देवी , देवता , ईश्वर आदि के संबोधन में।
उदाहरण :-
  1. हे ईश्वर ! वरुण का  कल्याण करो। 
  2. देवी ! हमे शक्ति दो। 
  3. हे राम ! तुम्हारा क्या होगा |
  •  अपने से छोटों के प्रति शुभकामना या सद्भावना दिखने के लिए 
  1. तुम्हारा कल्याण हो ! भगवान तुम्हारा भला करे 
  2. मुबारक हो ! आपके पुत्र हुआ है 

7 संयोजक – चिह्न ( – )

इस चिह्न का प्रयोग हिन्दी और अँगरेजी के शब्दों में इसका प्रयोग होता है। लेकिन  संस्कृत के शब्दों  में नहीं होता है जब दो शब्दों को जोड़ना हो , तो इस चिह्न का प्रयोग करें।
 
ध्यान दे :- इस चिह्न के प्रयोग की चर्चा ” वर्तनी : नियम एवं संशोधन ” अध्याय में की गयी है।

8 उद्धरण-चिह्न ( “——-” ) या ( ‘——‘ )

किसी के व्दारा कहे हुए  कथन को ज्यो का त्यों लिखने के लिए उध्दरण -चिन्ह का प्रयोग या अवतरण चिन्ह का प्रयोग किया जाता है 

इकहरा उध्दरण -चिन्ह:- किसी अक्षर य शब्द पर विशेष वाल दिया जाये तो इकहरा उध्दरण -चिन्ह(‘——‘) का प्रयोग जाता है 

उदाहरण :-

  1. ‘सौरव चोवे ‘ प्रसिद्ध कलाकार है
  2. ‘ रामचरितमानस ‘ धार्मिक पुस्तक ही नहीं ,

दुहरा /दोहरा उध्दरण चिन्ह :-किसी महत्वपूर्ण कथन को उध्दत करने के लिए दोहरा उध्दरण चिन्ह का प्रयोग किआ जाता है 

उदाहरण :- 

  1. सुभाष चन्द्र बोस ने कहा , “तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूँगा “
  2. मोहन ने कहा , “तुम मेरे साथ चलोगे “

9 कोष्ठक – चिह्न [ (  ) ]

वाक्य के वीच में आए हुए शब्दों अथवा पदों का अर्थ अधिक स्पष्ट करने के लिए कोष्ठिक चिन्हों का प्रयोग किया जाता है 
उदाहरण :- 
  • लता मंगेशकर को भारत कोकिला (मीठे गाने वाली ) कहा जाता है 
  • जनकनंदिनी (सीता) को भी अग्निपरीक्षा देनी पड़ी ।
  • रावण (दुराचारी) के कारण लंका का सर्वनाश हो गया ।
  • सिपाही (डंडा पटकते हुए) क्या तुमने चोरी नहीं की ? चोर (हाथ जोड़कर) नहीं , माई – बाप ! मैंने चोरी नहीं की।

10 निर्देश – चिह्न ( – )

निर्देशक चिन्ह ,योजक चिन्ह से थोडा लम्बा होता है और इसका प्रयोग निर्देश देने के लिए किया जाता है 
 
  •  किसी बात पर बल देने के लिए।
उदाहरण :- 
  1. रमेश के दो पुत्र थे -मोहन और कुश ।
  2. नेहरू ने कहा – आराम हराम है ।
  •  किसी वाक्य के बीच जब कोई स्वतंत्र वाक्य या वाक्यांश आ जाए , तो उसके दोनों ओर इस चिह्न का प्रयोग होता है। 

उदाहरण :- 

  1. यह घड़ी – जहाँ तक मेरा अनुमान है — चार साल पुरानी होगी । 
  •  किसी संवाद में, वक्ता के कथन के पहले। जैसे — 
  1. डॉक्टर – तुम्हें क्या हुआ है ?
  2. रोगी – जी, शरीर में बहुत दर्द है ।

11 लोप – चिल ( …… ) या ( xxxx )

 
1). यदि वाक्य के अंतर्गत किसी अवांछित शब्द या शब्दों को छोड़कर लिखना हो।
उदाहरण :-  
तुमने सुरेश को ——— कहकर गाली दी । 
 
2). रिक्त स्थानों की पूर्ति करनेवाले प्रश्नों में।
उदाहरण :- 
भारत की राजधानी ——— है।
 
3). गद्य या पद्य की कोई पंक्ति छोड़ दी गयी हो। 
उदाहरण :- 
  —————–  ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय ।

12 लाघव – चिह्न ( ० )

  • जब किसी शब्द को पूरा न लिखकर संक्षेप (छोटा शब्द) में लिखना हो , तो इस चिह्न का प्रयोग होता है। 
डॉक्टर सिंह   डॉ० सिंह
माध्यमिक विद्यालय , पटना  मा० वि०, पटना 
हस्ताक्षर ह०
जिला जि०
तिथि    ति०
  • शैक्षणिक उपाधियों एवं पदों के लिखने में प्रायः इस चिह्न का प्रयोग होता है।
उदाहरण :- 
 बी० ए० , एम० ए० ,एम० एल० ए०, एस० डी० ओ० ,आई० ए०, डी० एम० आदि । 

13 पुनरुक्तिसूचक-चिह्न (  ,,   ,,   ,,  )

लिखते समय शब्द या शब्दों की पुनरुक्ति से बचने के लिए इस चिह्न का प्रयोग होता है।
उदाहरण :- 
  • श्रीमती प्रीती  मीरा ,शीला ,,,,,,,,
          ,,       रीता सिंह ,     ,,
          ,,       सुधा सिन्हा ,   ,,
  • मनवीर तुम्हे नही पढ़ा रहा है 
       मोहन   ,,        ,,      ,,     ,,    ,,
        मैं       ,,   अंग्रेजी   ,,     ,,    हूँ ।
 

14 त्रुटि-चिह्न/ हंस पद   ( ^ )

लिखते समय यदि कोई शब्द या वाक्य छूट जाए, तो उस छूटे हुए शब्द या वाक्य को ऊपर लिखकर हंस पद  लिखते है 
उदाहरण :- 
                           (खाना) 
  • मनवीर दूध-रोटी ^ पसंद करता हूँ। 
                                ( वह वहाँ पढ़ना चाहता है)
  • हरीश  आज दिल्ली जा रहा है। ^ मैं भी उसके साथ जा रहा हूँ।

15 विवरण-चिह्न ( : – )

किसी वस्तु या विषय का सविस्तार वर्णन करने में इस चिह्न का प्रयोग होता है।
विश्व में कई ऐसे देश हैं जिनके पास आणविक हथियार हैं।
उदाहरण :- 
  रूस , अमेरिका , ब्रिटेन , फ्रांस , चीन , हिन्दुस्तान , पाकिस्तान आदि।
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